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Atmamanthan Kabir Vani Sang (Hindi) - Kabhi To Swayam Ko Samjho - cover
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Atmamanthan Kabir Vani Sang (Hindi) - Kabhi To Swayam Ko Samjho

Sirshree

Narrator Leena Bhandari

Publisher: WOW Publishings

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Summary

आत्ममंथन 
कबीर वाणी संग 
मंथन से मिले असली घी (गीता) 
कभी तो स्वयं को समझो 
दही को मथने पर मक्खन निकलता है। मक्खन दही में छिपा हुआ है। उसे बाहर निकालने के लिए मंथन आवश्यक है। मक्खन से ही सच्चा घी, सच्ची घीता (गीता) निर्माण होती है। आपको मंथन शक्ति से यह गीता प्राप्त करनी है। 
मक्खन से जो निकला वह घी था और मनन से निकलती है गीता। मन और देह के बीच जब मंथन होगा, जब श्रवण की मथनी माया को छिन्न-भिन्न करेगी तब ही आप अपनी गीता जान पाएँगे। इसके लिए अपने मटके को मजबूत और साफ रखना होगा। यह मटका, यह शरीर मजबूत होगा तब ही यह श्रवण की मथनी को झेल पाएगा। 
हर एक की गीता अलग है। जीवन के महाभारत में हर एक की भूमिका अलग है। इसलिए हरेक को आत्म-मंथन करना चाहिए। मथनी आपके हाथ में है। 
इस पुस्तक द्वारा अपने आपको जानकर, अपने शरीर की वृत्तियों को परखकर, इसके संस्कार और पैटर्न छानकर आप स्वयं अपनी ‘विश्वास गीता’ का मंथन करने में काबिल हो सकते हैं। 
आइए मनन की मथनी से आत्म-मंथन कर, सत्य का मक्खन पाएँ। 
लोग जीवन के सबक खट्टे-मीठ्ठे अनुभवों द्वारा सीखते हैं 
मगर बिना गिरे भी अनेक सबक 
मनन-मंथन की शक्ति द्वारा सीखे जा सकते हैं।
Duration: about 5 hours (05:13:14)
Publishing date: 2025-12-27; Unabridged; Copyright Year: — Copyright Statment: —