Unisciti a noi in un viaggio nel mondo dei libri!
Aggiungi questo libro allo scaffale
Grey
Scrivi un nuovo commento Default profile 50px
Grey
Iscriviti per leggere l'intero libro o leggi le prime pagine gratuitamente!
All characters reduced
मुझे डैडी से प्यार है - cover

मुझे डैडी से प्यार है

Shelley Admont, KidKiddos Books

Casa editrice: KidKiddos Books

  • 0
  • 0
  • 0

Sinossi

छोटा खरगोश जिम्मी अपने बड़े भाइयों की तरह साइकिल चलाना नहीं जानता था। इसके लिए कई बार उसे चिढ़ाया भी जाता था। लेकिन जब डैडी ने उसे बताया कि कोई भी नई चीज़ सीखते समय बिल्कुल भी डरना नहीं चाहिए, वहीं से कहानी का असली मज़ा शुरू होता है।
बच्चों की यह किताब सोने के समय पढ़ी जाने वाली लघु कहानियों के संग्रह का एक हिस्सा है।
यह कहानी सोने के समय आपके बच्चों के पढ़ने के लिए आदर्श है और यहां तक कि पूरे परिवार के लिए भी काफी रोचक है!
Disponibile da: 20/01/2023.
Lunghezza di stampa: 34 pagine.

Altri libri che potrebbero interessarti

  • Love Teaches The Real Value of Life - cover

    Love Teaches The Real Value of Life

    H.R. Koli

    • 0
    • 0
    • 0
    एक दिल टूटा हुआ युवक, विश्वासघात से चकनाचूर होकर, जीवन के चौराहे पर खड़ा है। जिस प्यार पर वह विश्वास करता था, वह एक दर्दनाक सबक बन जाता है जब जिस लड़की पर वह भरोसा करता था, वह उसके दिल को दौलत के लिए बेच देती है। यह प्यार, धोखे और फिर से खोजने की कहानी है, जहाँ दिल टूटने के निशान उसे जीवन और रिश्तों के वास्तविक मूल्य को समझने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। 
    कवर में एक उदास आदमी को मंद रोशनी वाली सड़क पर अकेले खड़े हुए दिखाया जा सकता है, जिसमें पृष्ठभूमि में एक लड़की की धुंधली सिल्हूट है, जो विश्वासघात का प्रतीक है। दिल टूटने और खोए हुए प्यार के विषयों पर जोर देने के लिए टूटे हुए कांच या मुरझाते गुलाब जैसी सूक्ष्म कल्पनाएँ शामिल करें।
    Mostra libro
  • Miracle of Gratitude The (Hindi) - cover

    Miracle of Gratitude The (Hindi)

    Sirshree

    • 0
    • 0
    • 0
    The Glory of Thankfulness 
    जहाँ कृतज्ञता होती है, 
    वहाँ प्रकृति की महिमा खिल उठती है… 
    किसी के प्रति आभार प्रकट करने के लिए हम धन्यवाद, शुक्रिया, थैंक्यू, आभार आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। दरअसल ‘धन्यवाद’ यह शब्द एक छोटी सी चुंबकीय प्रार्थना है। जिसे अलग-अलग भाषाओं में, अलग-अलग तरह से कहा जाता है। धन्यवाद कहते ही कुदरत की सुंदरता और उसकी शक्तियाँ हमारे आस-पास जीवित हो जाती हैं। हमें कुदरत के अद्भुत चमत्कारों को देखने का अवसर मिलता है। 
    अब सवाल यह उठता है कि क्या कुदरत को सभी भाषाओं का ज्ञान है? अगर वह भाषा ही सुन रही होती तो क्या होता? कैसे सभी का हिसाब-किताब रखती? मगर ऐसा नहीं है! कुदरत भाषा नहीं, भाव तरंग समझती है। 
    कुदरत में आपके द्वारा कहे गए शब्द नहीं, आपकी भावना पहुँचती है और वह कार्य करती है। जैसे- जब आपको कोई चीज़ जो आप चाहते थे, वह मिल जाती है तो उसके लिए आप धन्यवाद कहते हैं यानी आप ‘है’ की फीलिंग में हैं। इसी प्रकार जो चीज़ आपके पास नहीं है और आप उसे पाना चाहते हैं तो उसके लिए भी जब आप धन्यवाद देते हैं तब यूनिवर्स आपके कहे शब्दों पर नहीं बल्कि ‘है’ की फीलिंग को जान रही होती है। यह कुदरत के देने का रहस्य है। यही ग्लोरी ऑफ थैंकफुलनेस यानी कृतज्ञता की महिमा है। 
    इसे समझकर यदि हम कृतज्ञता के साथ कुदरत संग तालमेल बिठाते हैं तो जीवन की धारा हमें खुशी और संतोष की ओर बड़ी सरलता से ले जाती है।
    Mostra libro
  • Building Eater - Sci-Fi Story - cover

    Building Eater - Sci-Fi Story

    Dharmendra Mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    वे आए थे सफाई करने… अब सबकुछ निगल जाएंगे।” 
    “कचरे से इमारतों तक — उनकी भूख असीम है।” 
    “धरती की आख़िरी जंग… अपने ही सफाईकर्मियों से।” 
    “जब इलाज ही सबसे बड़ा हादसा बन जाए।” 
    “कभी थे रक्षक… अब हैं विनाशक।” 
    “बिल्डिंग ईटर” एक अनोखी साइंस-फिक्शन थ्रिलर है, जहाँ समुद्र किनारे मिले रहस्यमयी जीव शुरुआत में कचरा और प्लास्टिक खाकर मानवता के लिए वरदान बनते हैं। लेकिन जब वही जीव धीरे-धीरे पत्थर और ऊँची इमारतें निगलने लगते हैं, तो पूरी दुनिया विनाश के खतरे में आ जाती है। 
    क्या वैज्ञानिक और प्रशासन मिलकर इन्हें रोक पाएंगे, या यह जीव पूरी सभ्यता को मिटा देंगे? 
    सुनिए यह रोमांचक ऑडियोबुक, जो हॉलीवुड-स्टाइल साइंस थ्रिलर और भारतीय सामाजिक टच का अनोखा संगम है। 
    .................“Building Eater” is a unique science-fiction thriller where mysterious creatures found on the seashore start by eating waste and plastic, turning into unexpected saviors of humanity. But soon, their hunger grows to rocks and skyscrapers, pushing the world towards destruction. 
    Can a scientist and an officer stop them in time, or will these creatures erase civilization forever? 
    Experience this gripping audiobook — a blend of Hollywood-style monster thriller with an Indian social twist.
    Mostra libro
  • जज़्बात की उड़ान - cover

    जज़्बात की उड़ान

    धोंडो केशव कर्वे

    • 0
    • 0
    • 0
    जिन्दगी की शाम जब ढलने लगी तभी एक रोज तनहाई में ख्याल आया कि दिन रात खुशहाल जिंदगी के सपनों का पीछा करते करते थक सा गया हूं। मेरी तमाम उम्र कटी इस सुख सुविधा कमाने में, जिंदगी का बेशकीमती वक्त बीत गया दो वक्त की जरूरत जुटाने में हताश हू यह सोचकर कि जिंदगी में मैने ऐसा क्या किया कि नाकामयाबी ने हरदम मेरा ही साथ है निभाया। 
    तमाम उम्र खामोश रहा उफ तक नही की, इस दिल की चुप्पी ने अब दम तोड़ा है और मेरे जजबात ने उड़ान भरी है। मर्मान्तक पीड़ा के सागर से ही मधुर कविता के मोती निकलते है। कुछ नई कोपलों ने पुराने दरख्त में अपना आशियाना सजाया है और जिंदगी की जिंदादिली को और मजबूत बनाया है। 
    इस सफर के दौरान जो कुछ भूल गया था सब को बारी-बारी से याद करके कागज पर उतार दिया है।
    Mostra libro
  • 10th Fail - cover

    10th Fail

    Ajay Raj Singh

    • 0
    • 0
    • 0
    जीवन में लगे हर आग का कारण सिर्फ आपकी गलतियाँ नहीं होती हैं, कुछ आपकी किस्मत भी सुलगा देती है। ये कहानी है बबलू शुक्ला की। जनाब कांट्रेक्टर हैं। 28 के हो गए हैं, पर शादी नहीं हुई अभी तक। खुद कुछ कर नहीं पाए, अम्मा को कुछ करने नहीं देते। ये गाँव के वो युवा हैं, जो इनकी उम्र में अविवाहित रह जाएँ तो लोग युवा कहने से भी कतराने लगते हैं। शादी से डरते नहीं हैं, बस थोड़ा नरबसा जाते हैं। ठेकेदारी की शुरुआत छोटे-मोटे कामों से हुई थी, पर जब से इनको समझ आया है कि रिश्वत देकर सरकारी tender मिल जाते हैं, काम अलग ही level पर पहुँच गया है। इस कहानी में एक लड़का है, एक लड़की है, दो दोस्त हैं, एक गाँव है। वो सब कुछ, जो हो सकता है। पर इसके साथ मिलेगा शुक्ला जी का खुद पर अपार विश्वास, धंधे में आ रही दिक्कतें, रिश्तों की गहराई, नैतिकता पर सवाल और हल्का सा इश्क। बस... हल्का सा।
    Mostra libro
  • बारिश - cover

    बारिश

    कृतिका गुप्ता

    • 0
    • 0
    • 0
    उसने चाँद माँगा, मैंने आइना दे दिया 
    उमेश कुमार गुप्ता की बेहतरीन कविताओं का संग्रह बारिश
    Mostra libro