Join us on a literary world trip!
Add this book to bookshelf
Grey
Write a new comment Default profile 50px
Grey
Subscribe to read the full book or read the first pages for free!
All characters reduced
पवित्र आत्मा - cover

पवित्र आत्मा

Dr. Brian J. Bailey

Publisher: Zion Christian Publishers

  • 0
  • 0
  • 0

Summary

"द कंफर्टर" (पवित्र आत्मा) कोई साधारण थियोलॉजी की किताब नहीं है, बल्कि यह आत्मा से भरपूर और आत्मा द्वारा चलाए जाने वाले जीवन की राह दिखाने वाली एक बहुत ही व्यावहारिक और उपयोगी मार्गदर्शिका है।जो लोग पवित्र आत्मा को गहराई से जानना और अनुभव करना चाहते हैं, वे डॉ. बेली की इस पुस्तक को पढ़कर आशीषित होंगे। इसमें पवित्र आत्मा के सात पहलुओं की चर्चा की गई है:पवित्र आत्मा का व्यक्तित्वपवित्र आत्मा की सेवाकाईप्रभु की सात आत्माएँपवित्र आत्मा का बपतिस्माआत्मा के नौ वरदानआत्मा के नौ फलआत्मा से भरपूर और आत्मा द्वारा संचालित जीवन
Available since: 09/08/2025.

Other books that might interest you

  • Ashtavakra Mahagita Vol1 - cover

    Ashtavakra Mahagita Vol1

    Osho

    • 0
    • 0
    • 0
    Ashtavakra aur raja Janak ke beech is adbhut sanvaad ki garima ko Osho ne apni amrit vaani dwara uski poornata mein prakat kiya hai. Ashtavakra-Janak sanvaad evam prashnottar ke maadhyam se Osho dharm, saadhana, tatha chetna ki atal gahrai mein hamein le chalte hain. Is apoorva sanvaad ko mahageeta kehkar Osho ne usme anoothi praan-pratistha ki hai.
    
    - Chapter 1: Satya Ka Shuddhatam Vaktavya
    - Chapter 2: Samaadhi Ka Sutra: Vishraam
    - Chapter 3: Jaisi Mati Vaisi Gati
    - Chapter 4: Karm, Vichaar, Bhaav - Aur Sakshi
    - Chapter 5: Saadhana Nahi - Nishtha, Shradda
    - Chapter 6: Jago Aur Bhogo
    - Chapter 7: Jaagran Mahamantra Hai
    - Chapter 8: Nayanta Nahi - Sakshi Bano
    - Chapter 9: Mera Mujhko Namaskaar
    - Chapter 10: Hari Om Tatsat
    Please note: This audiobook is in Hindi.
    © & ℗ 1976 OSHO International Foundation
    Show book
  • Sachchi Ramayan - cover

    Sachchi Ramayan

    ई.वी. रामासामी पेरियार

    • 0
    • 0
    • 0
    पेरियार रामायण को एक राजनीतिक ग्रन्थ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दक्षिणवासी अनार्यों पर उत्तर के आर्यों की विजय और प्रभुत्व को जायज़ ठहराने के लिए लिखा गया और यह ग़ैर-ब्राह्मणों पर ब्राह्मणों और महिलाओं पर पुरुषों के वर्चस्व का उपकरण है। रामायण की मूल अन्तर्वस्तु को उजागर करने के लिए पेरियार ने 'वाल्मीकि रामायण' के अनुवादों सहित; अन्य राम कथाओं, जैसे—'कंब रामायण', 'तुलसीदास की रामायण' (रामचरित मानस), 'बौद्ध रामायण', 'जैन रामायण' आदि के अनुवादों तथा उनसे सम्बन्धित ग्रन्थों का चालीस वर्षों तक अध्ययन किया और 'रामायण पादीरंगल' (रामायण के पात्र) में उसका निचोड़ प्रस्तुत किया। यह पुस्तक 1944 में तमिल भाषा में प्रकाशित हुई। इसका अंग्रेज़ी 'द रामायण: अपन ट्रू रीडिंग' नाम से 1959 में प्रकाशित हुआ।
    Show book
  • Atmamanthan Kabir Vani Sang (Hindi) - Kabhi To Swayam Ko Samjho - cover

    Atmamanthan Kabir Vani Sang...

    Sirshree

    • 0
    • 0
    • 0
    आत्ममंथन 
    कबीर वाणी संग 
    मंथन से मिले असली घी (गीता) 
    कभी तो स्वयं को समझो 
    दही को मथने पर मक्खन निकलता है। मक्खन दही में छिपा हुआ है। उसे बाहर निकालने के लिए मंथन आवश्यक है। मक्खन से ही सच्चा घी, सच्ची घीता (गीता) निर्माण होती है। आपको मंथन शक्ति से यह गीता प्राप्त करनी है। 
    मक्खन से जो निकला वह घी था और मनन से निकलती है गीता। मन और देह के बीच जब मंथन होगा, जब श्रवण की मथनी माया को छिन्न-भिन्न करेगी तब ही आप अपनी गीता जान पाएँगे। इसके लिए अपने मटके को मजबूत और साफ रखना होगा। यह मटका, यह शरीर मजबूत होगा तब ही यह श्रवण की मथनी को झेल पाएगा। 
    हर एक की गीता अलग है। जीवन के महाभारत में हर एक की भूमिका अलग है। इसलिए हरेक को आत्म-मंथन करना चाहिए। मथनी आपके हाथ में है। 
    इस पुस्तक द्वारा अपने आपको जानकर, अपने शरीर की वृत्तियों को परखकर, इसके संस्कार और पैटर्न छानकर आप स्वयं अपनी ‘विश्वास गीता’ का मंथन करने में काबिल हो सकते हैं। 
    आइए मनन की मथनी से आत्म-मंथन कर, सत्य का मक्खन पाएँ। 
    लोग जीवन के सबक खट्टे-मीठ्ठे अनुभवों द्वारा सीखते हैं 
    मगर बिना गिरे भी अनेक सबक 
    मनन-मंथन की शक्ति द्वारा सीखे जा सकते हैं।
    Show book
  • Premanjali - Aadhyatmik Tarike Se Purvajo Ka Sachcha Shraddha Kaise Kare - The Spiritual Healing of Karmic Bondages - cover

    Premanjali - Aadhyatmik Tarike...

    Sirshree

    • 0
    • 0
    • 0
    पितृदोष मिटाने की युक्ति से सबकी मुक्ति 
    अपने प्रियजनों को खोने के बाद क्या आपने उनके प्रति मन में डर, पछतावा या अधूरापन महसूस किया है? 
    क्या आप चाहते हैं, जो प्रेम और श्रद्धा आपके हृदय में है, आपके पूर्वजों तक पहुँचे? 
    क्या आप पितृपक्ष से संबंधित कर्मकाण्डों के पीछे का वास्तविक सत्य जानना चाहते हैं? 
    यदि ‘हाँ’ तो यह पुस्तक इसका जवाब है। इसमें जानें: 
    पितृदोष से मुक्ति की समझ 
    कर्मबंधन से मुक्ति पाने के उपाय 
    पूर्वजों को सच्ची श्रद्धांजलि देने का तरीका 
    पूर्वजों की मुक्ति के लिए ध्यान और प्रार्थना 
    रिश्तों में मधुरता लाने की कला 
    यह पुस्तक केवल धार्मिक या आध्यात्मिक मार्गदर्शिका नहीं बल्कि एक यात्रा है, पूर्णता की ओर। यह आपको आंतरिक शांति और संतुष्टि का अनुभव कराएगी। 
    यदि आप अपने पूर्वजों के प्रति प्रेममयी भावनाएँ अर्पित करना चाहते हैं तो यह पुस्तक आपके लिए है।
    Show book
  • Hindi Contemporary Audio New Testament – Hindi Contemporary Version - cover

    Hindi Contemporary Audio New...

    Zondervan Zondervan

    • 0
    • 0
    • 0
    Enjoy this voice-only audio recording of the Hindi Contemporary Version™ New Testament, read by one reader. The Hindi Contemporary Version™ offers a faithful rendering of Scripture’s original word order while also delivering the most comprehensive and clear translation of the Bible’s stories and concepts in the Hindi language. 
     
    Show book
  • रावण - एक आदमी के दस चेहरे - cover

    रावण - एक आदमी के दस चेहरे

    Guru Shivram

    • 0
    • 0
    • 0
    मैं कभी दस सिर वाला नहीं था। मैं दस दिमाग वाला था... और किसी में भी शांति नहीं थी। 
    वे कहते हैं कि मैं अंधकार से पैदा हुआ हूँ—राक्षसों से, छल से, क्रोध से। 
    लेकिन मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ: तुम्हें किसने सिखाया कि प्रकाश पवित्र है और अंधकार अशुद्ध? 
    मैं बुरा पैदा नहीं हुआ था। मैं असाधारण पैदा हुआ था । 
    दुनिया मुझे कई नामों से जानती है: लंकेश, दशमुख, राक्षस, दानव। 
    लेकिन इनमें से कुछ भी बनने से पहले, मैं एक साधक था। 
    उन्होंने कहा कि मैं घमंडी हूँ। शायद मैं था भी। लेकिन बताइए—क्या कोई शेर अपनी दहाड़ के लिए कभी माफ़ी मांग सकता है? 
    लोग युद्ध को याद करते हैं। वे अपहरण, लंका दहन, अंतिम बाण को याद करते हैं। 
    लेकिन वे उससे पहले के वर्षों को भूल जाते हैं। वे वर्ष जब मैंने बुद्धिमानी से शासन किया। वे वर्ष जब मैंने गरीबों को भोजन कराया, ऋषियों की रक्षा की, संगीतकारों का सम्मान किया, विद्वानों का आतिथ्य किया। मेरी लंका सिर्फ़ पत्थर में स्वर्णिम नहीं थी। वह विचारों में, संस्कृति में, तेज में दमकती थी। 
    लेकिन ये कोई बचाव नहीं है। 
    ये माफ़ी की याचना नहीं है। 
    ये तो... स्वीकारोक्ति है । 
    क्योंकि राम के विरुद्ध मैंने जो युद्ध लड़ा था, वह मेरा पहला युद्ध नहीं था। 
    मेरा असली युद्ध तो मेरे भीतर था। 
    तुम्हारी कहानियों में उन्होंने जो भी सिर चित्रित किए थे—वे आभूषण नहीं थे। वे मेरे बोझ थे। हर एक का एक चेहरा था जिसे मैं चुप नहीं करा सकती थी: अहंकार, इच्छा, क्रोध, महत्वाकांक्षा, प्रेम, ज्ञान, संदेह, तर्क, भय और अभिमान। वे मुझसे फुसफुसाते थे। मुझ पर चिल्लाते थे। मुझसे झूठ बोलते थे। और मैं... मैंने उनकी बात मान ली। 
    ये सिर्फ़ मेरी कहानी नहीं है। ये आपकी भी है। क्योंकि आपके अंदर भी दस आवाज़ें हैं। 
    और जिसकी आप सबसे ज़्यादा सुनते हैं... वही तय करेगी कि आप कैसी ज़िंदगी बनाएँगे या कैसा साम्राज्य जलाएँगे। 
    तो ध्यान से सुनो। 
    मेरी। 
    अपनी। 
    मैं रावण हूँ। 
    और यही मनुष्य के दस चेहरों के पीछे का सच है।
    Show book