¡Acompáñanos a viajar por el mundo de los libros!
Añadir este libro a la estantería
Grey
Escribe un nuevo comentario Default profile 50px
Grey
Suscríbete para leer el libro completo o lee las primeras páginas gratis.
All characters reduced
मुझे फल और सब्जियां खाना पसंद है - cover

मुझे फल और सब्जियां खाना पसंद है

Shelley Admont, KidKiddos Books

Editorial: KidKiddos Books

  • 0
  • 0
  • 0

Sinopsis

छोटे खरगोश जिम्मी को कैंडी खाना बहुत पसंद है| एक दिन वह अलमारी में छुपा कर रखा गया कैंडी का एक थैला ढूँढने के लिए चुपके से रसोईघर में घुस गया| वह उस थैले तक पहुँचने ही वाला था, कि अचानक क्या हुआ? यह तो आपको सुन्दर चित्रों से सजी इस रोचक कहानी को पढ़ने के बाद ही पता चलेगा| उस दिन के बाद से उसने अपनी खाने को आदतों को सुधार लिया और अब तो वह सारे फल और सब्जियाँ भी खाता है| 
Disponible desde: 20/01/2023.
Longitud de impresión: 34 páginas.

Otros libros que te pueden interesar

  • हास्य कविता - cover

    हास्य कविता

    प्रवीण कुमार केसरी

    • 0
    • 0
    • 0
    प्रवीण कुमार केसरी की कविता हास्य व्यंग
    Ver libro
  • मस्तिष्क विज्ञान और पढ़ाई आसान - cover

    मस्तिष्क विज्ञान और पढ़ाई आसान

    Dr vinod sharma

    • 0
    • 0
    • 0
    हमारे दिमाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है सूचनाओ को सही तरीके से रखना और जरूरत पड़ने पर पुनः प्राप्त करना। जिसे हम री-कलेक्शन कहते है। इन्फॉर्मेशन को प्राप्त करना कहलाता है याद करना यानी मेमोराइजेशन, दिमाग मे रखना कहलाता है रिटेंशन और 'पुनः प्राप्त करना यानी याद आना कहलाता है री - कलेक्शन | याद तो हम सब कुछ करते है, लेकिन सब कुछ याद आता नही है। क्योकि याद आना निर्भर करता है की दिमाग मे सूचना कहाँ और किस तरह से रखी गयी है। सूचना को अच्छी तरह से सही जगह पर रखने के लिए हमे एसोसियशन की जरूरत पड़ती है। इस पुस्तक में हम जानेंगे कि कैसे जल्दी और बिना रटे याद करें और क्या करें कि ना भूले, साथ ही मस्तिष्क विज्ञान के रोचक और मनोरंजक प्रयोग करेंगे और दिमाग को तेज करना सीखेंगे|
    Ver libro
  • बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर - cover

    बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर

    उमेश कुमार गुप्ता

    • 0
    • 0
    • 0
    उमेश कुमार गुप्ता की निबंध संग्रह बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर सुनिए पल्लव के साथ
    Ver libro
  • Karwan E Hayat - cover

    Karwan E Hayat

    विजय कुमार "नाकाम"

    • 0
    • 0
    • 0
    विजय कुमार 'नाकाम का कविता संग्रह पढ़ते हुए यूं महसूस होता है। जैसे हम अपने ही जीवन के किसी हिस्से की कथा पढ़ रहे हैं । कविता में दर्द की प्रमुखता है और प्रभावित भी करता है पढ़ते हुए लगता है कवि की जिंदगी दर्द की गलियों से ज्यादा गुजरी है परिस्थिति वश दबा ढका दर्द उभर कर कविता में उतरा होगा। कहीं पर मुस्कराहट भी है, व्यंग भी है। सामाजिक विसंगति यों पर कटाक्ष भी है। कई कविता में कवि ने कई मशहूर हस्तियों, शायरों और बादशाहों को याद करते हुए उनके साथ हुए हादसों का वर्णन किया है। जिसे पढ़ते हुए विद्वान पाठक को वर्णित व्यक्ति की याद आ जाती है। 
    संग्रह में आध्यात्मिक रस से ओतप्रोत कविता 'उलझन' भी हैं शुरुआत में पता ही नहीं चलता, मगर अंत में लगता हैं कि कवि अपने प्रयास में सफल हुआ है। कई अत्यन्त गूढ़ शब्द प्रयोग किए गए हैं जो योग एवं अध्यात्म से जुड़े लोग ही समझ पाएंगे। 
    बुढ़ापे में अनगिनत समस्याओं का विशद और दर्दनाक वर्णन हुआ है। एक सामाजिक बुराई की ओर इंगित करते हुए युवा पीढ़ी को नसीहत देते हुए बड़ी नफासत से अपनी बात कही गई है। 
    डरे डरे से कदम कोरोना काल पर हर एक पहलू से अवलोकन करते हुए कवि बड़ी गहनता से हर समस्या, पीड़ा और यातना का सटीक वर्णन करता है। 
    किताब का दर्द में समसामयिक 
    मुक्त कविता का चलन हुआ है 
    विषय पर गहनता से अध्ययन कर के हर पहलू को बताया गया है जब से छंद तब से स्वयं प्रकाशन करने की प्रतियोगिता-सी चल पड़ी है। हर कोई लेखक बन गया है। लिखा खूब जा रहा है प्रकाशित भी हो रहा हैं। प्रकाशन एक सुव्यवस्थित व्यवसाय हो गया है लेखक भी यही व्यवस्था का भुक्तभोगी है। प्रकाशित पुस्तकों का अंजाम क्या होता है? या तो मुफ्त में वितरित होती है या उधई या कबाड़ी का पेट भरता है। 
    कई कविताएं लेखक ने अपने परिवार के सदस्यों के ऊपर लिखी है। जिसकी भाषा से यही पर लक्षित होता है कि उर्दू के साथ हिन्दी पर भी कवि का समान अधिकार है। 
    शेर और मुक्तक भी अच्छे लिखे गए हैं। उर्दू के साथ-साथ हिन्दी का भी व्यापक उपयोग हुआ हैं। हिंदी भाषियों के लिए कवि अगर कठिन उर्दू शब्दों का अर्थ भी रचना के अंत में दिया गया होता तो कविता संग्रह की उप 
    देयता और बढ़ जाती।
    Ver libro
  • कागभुशुंडी:कलयुग का गूढ़ रहस्य: भाग-3 - Mythology - cover

    कागभुशुंडी:कलयुग का गूढ़ रहस्य:...

    Dharmendra Mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    📖 कागभुशुण्डि—एक अमर योगी, महान ऋषि और दिव्य दृष्टा, जो रामायण के गूढ़ रहस्यों के ज्ञाता हैं। उनकी कथा में छुपा है भक्ति, ज्ञान, मोक्ष और अनंत कालचक्र का रहस्य। 🌿🕉️ 
    🔱 क्या है यह पौराणिक ऑडियो सीरीज़? 
    यह एक सुनने योग्य महागाथा है, जो श्रीमद् रामायण के गूढ़ रहस्यों को आधुनिक ध्वनि प्रभाव और संवेदनशील वाचन के माध्यम से जीवंत करेगी। इसमें होंगे ऋषि कागभुशुण्डि और गरुड़ जी के संवाद, जिनमें छिपे हैं अवतार, कर्म, माया, मृत्यु और मोक्ष के गूढ़ रहस्य। 🔊✨ 
    📌 इस सीरीज़ में क्या मिलेगा? 
    🔸 कालचक्र का रहस्य—अतीत, वर्तमान और भविष्य एक साथ कैसे जुड़े हैं? 
    🔸 भगवान राम के जीवन का अद्भुत व्याख्यान 
    🔸 कर्म और पुनर्जन्म की गहरी व्याख्या 
    🔸 भगवद भक्ति और ज्ञानमार्ग की अद्वितीय शिक्षा 
    🔸 मृत्यु, परलोक और मोक्ष के अनकहे रहस्य 
    🔸 ऋषियों और देवताओं के संवाद—सारगर्भित उपदेश 
    🎧 क्यों सुने यह ऑडियो सीरीज़? 
    ✅ पौराणिक ग्रंथों पर आधारित सटीक और प्रमाणिक कथा 
    ✅ आधुनिक कहानी कहने की शैली और ध्वनि प्रभाव 
    ✅ भक्ति, ज्ञान और ध्यान के लिए प्रेरणादायक 
    ✅ हिन्दू संस्कृति और सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर 
    🕉️ अमर कथा, अनंत ज्ञान, शाश्वत सत्य! 
    🙏 सनातन संस्कृति का गौरव, आत्मा का जागरण!
    Ver libro
  • आखिर गलती किसकी - cover

    आखिर गलती किसकी

    रोहिदास सानप

    • 0
    • 0
    • 0
    आखिर गलती किसकी कहानी है एक ऐसे परिवार की जहां सीमा और उसका पति सौरभ रिश्तों को निभाने की पूरी ईमानदारी से कोशिश करते हैं। इसके उपरांत भी एक छोटी सी बात, पूरे परिवार को संकट में डाल देती है। अनजाने में हुई एक गलती का खामियाजा निशा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। निशा ने मरने से पहले आखिर उस पत्र में ऐसा क्या लिखा था जिसे पढ़कर सौरभ ने खुद को उसकी मौत का जिम्मेदार मानते हुए ऐसा कदम उठा लिया जिससे सीमा और सौरभ के परिवार वालों के साथ-साथ वहां उपस्थित सभी लोग स्तब्ध रह जाते हैं। कैसे एक छोटी सी गलती के कारण हंसता खेलता परिवार पूरी तरह टूट कर बिखर जाता है। अब उस नन्हे से मासूम बच्चे का क्या होगा जिसे निशा जन्म देते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती है। सीमा के परिवार में घटी इस घटना के पीछे क्या कारण था? आखिर इसमें गलती किसकी थी ? कहीं ऐसी कोई घटना हमारे आसपास या खुद हमारे परिवार में तो नहीं घटने वाली है? क्योंकि यह सिर्फ कहानी नहीं आज की सच्चाई भी है इन सभी प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए आई सुनते हैं बुक ऑडियो पर आखिर गलती किसकी ये कहानी संग्रह अमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है।
    Ver libro