¡Acompáñanos a viajar por el mundo de los libros!
Añadir este libro a la estantería
Grey
Escribe un nuevo comentario Default profile 50px
Grey
Suscríbete para leer el libro completo o lee las primeras páginas gratis.
All characters reduced
मुझे डे-केयर सेंटर जाना बहुत पसंद है - cover

मुझे डे-केयर सेंटर जाना बहुत पसंद है

Shelley Admont, KidKiddos Books

Editorial: KidKiddos Books

  • 0
  • 0
  • 0

Sinopsis

छोटा खरगोश जिमी बहुत उदास और घबराया हुआ है। कल उसका डे-केयर में पहला दिन है, लेकिन वो  घर पर अपनी मम्मी के साथ रहना चाहता है। यह जानने के लिए, कि उसका टेडी बियर उसे जोश दिलाने और ख़ुश महसूस कराने में कैसे मदद करता है, जिमी के साथ जुड़ कर इस रोचक यात्रा पर चलें। 
यह बच्चों की किताब आपके नन्हे मुन्नों की पहली बार अपने माता-पिता को छोड़ कर जाने की चिंताओं को दूर करने में मदद करेगी, इसके साथ साथ यह उन्हें नए बदलाव को अपनाने में भी मदद करेगी। 
अंत में, जिमी को समझ आ गया कि डे-केयर कितना मज़ेदार होता है!
यह कहानी सोने के समय बच्चों को सुनाने के लिए उपयुक्त है और पूरे परिवार के लिए मनोरंजक भी है! 
Disponible desde: 20/01/2023.
Longitud de impresión: 34 páginas.

Otros libros que te pueden interesar

  • भारतीय डरावनी रातें - डर सिर्फ अंधेरे में नहीं होता… वह वहीं रहता है जहाँ इंसान सच बोलने से डरता है।” - cover

    भारतीय डरावनी रातें - डर सिर्फ...

    Amulya Mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    इंडियन हॉरर नाइट्स – अमूल्या मिश्रा द्वारा 
     19 कहानियाँ। एक रात। और डर जो कभी खत्म नहीं होता। 
    रात बीती, मगर नींद नहीं आई। 
     बरगद के नीचे कुछ था — जो सुनता भी था, और बोलता भी। 
     और अगली अमावस्या से पहले, वह सिर्फ नाम पुकारता नहीं था… 
     वह नाम लेता था। 
    भारत की भूमि पर जितनी कहानियाँ जीवित हैं, उतने ही भूत भी। 
     इंडियन हॉरर नाइट्स — 19 डरावनी कहानियों का संग्रह, जो आपको लोककथा, विश्वास और पाप की सीमा तक ले जाएगी। 
    यह सिर्फ डर की किताब नहीं — यह भारत के अंधेरे हिस्सों का नक्शा है। 
     हर अध्याय एक नए राज्य, एक नए श्राप, और एक नई आत्मा की कहानी कहता है। 
    🩸 शामिल कहानियाँ:बरगद की फुसफुसाहट (केरल)मलचा महल का मध्यरात्रि रहस्य (दिल्ली)कुएँ की दुल्हन (राजस्थान)बनारस घाटों की आवाज़ें (उत्तर प्रदेश)हाईवे की चुड़ैल (झारखंड)हवेली का आईना (लखनऊ)अघोरी का श्राप (वाराणसी)ऊटी का कमरा 207 (तमिलनाडु)नागिन का प्रतिशोध (छत्तीसगढ़)शनिवारवाड़ा की चुप्पी (पुणे) (और कई और…) 
    🕯️ लेखक: अमूल्या मिश्रा 
     📖 उपलब्धता: Amazon.com और Kindle पर
    Ver libro
  • एक्ने का उपचार‎ - cover

    एक्ने का उपचार‎

    Owen Jones

    • 0
    • 0
    • 0
    एक्ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों की समस्या है, और उनमें से अधिकांश लोग युवा हैं और इस उलझन, ‎और यहां तक कि अपराधबोध और शर्म से निपटने के लिए भावनात्मक रूप से तैयार नहीं होते हैं, और ‎अक्सर उन्हें इस बारे में सताया भी जाता है, अक्सर एक्ने के प्रकोप के साथ यह सब भी जुड़ा हुआ होता ‎है। इस पुस्तिका में निहित ज्ञान आपको एक्ने से निपटने में मदद करेगा। ‎
    Ver libro
  • Miracle of Gratitude The (Hindi) - cover

    Miracle of Gratitude The (Hindi)

    Sirshree

    • 0
    • 0
    • 0
    The Glory of Thankfulness 
    जहाँ कृतज्ञता होती है, 
    वहाँ प्रकृति की महिमा खिल उठती है… 
    किसी के प्रति आभार प्रकट करने के लिए हम धन्यवाद, शुक्रिया, थैंक्यू, आभार आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। दरअसल ‘धन्यवाद’ यह शब्द एक छोटी सी चुंबकीय प्रार्थना है। जिसे अलग-अलग भाषाओं में, अलग-अलग तरह से कहा जाता है। धन्यवाद कहते ही कुदरत की सुंदरता और उसकी शक्तियाँ हमारे आस-पास जीवित हो जाती हैं। हमें कुदरत के अद्भुत चमत्कारों को देखने का अवसर मिलता है। 
    अब सवाल यह उठता है कि क्या कुदरत को सभी भाषाओं का ज्ञान है? अगर वह भाषा ही सुन रही होती तो क्या होता? कैसे सभी का हिसाब-किताब रखती? मगर ऐसा नहीं है! कुदरत भाषा नहीं, भाव तरंग समझती है। 
    कुदरत में आपके द्वारा कहे गए शब्द नहीं, आपकी भावना पहुँचती है और वह कार्य करती है। जैसे- जब आपको कोई चीज़ जो आप चाहते थे, वह मिल जाती है तो उसके लिए आप धन्यवाद कहते हैं यानी आप ‘है’ की फीलिंग में हैं। इसी प्रकार जो चीज़ आपके पास नहीं है और आप उसे पाना चाहते हैं तो उसके लिए भी जब आप धन्यवाद देते हैं तब यूनिवर्स आपके कहे शब्दों पर नहीं बल्कि ‘है’ की फीलिंग को जान रही होती है। यह कुदरत के देने का रहस्य है। यही ग्लोरी ऑफ थैंकफुलनेस यानी कृतज्ञता की महिमा है। 
    इसे समझकर यदि हम कृतज्ञता के साथ कुदरत संग तालमेल बिठाते हैं तो जीवन की धारा हमें खुशी और संतोष की ओर बड़ी सरलता से ले जाती है।
    Ver libro
  • कागभुशुंडी:कलयुग का गूढ़ रहस्य: भाग-3 - Mythology - cover

    कागभुशुंडी:कलयुग का गूढ़ रहस्य:...

    Dharmendra Mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    📖 कागभुशुण्डि—एक अमर योगी, महान ऋषि और दिव्य दृष्टा, जो रामायण के गूढ़ रहस्यों के ज्ञाता हैं। उनकी कथा में छुपा है भक्ति, ज्ञान, मोक्ष और अनंत कालचक्र का रहस्य। 🌿🕉️ 
    🔱 क्या है यह पौराणिक ऑडियो सीरीज़? 
    यह एक सुनने योग्य महागाथा है, जो श्रीमद् रामायण के गूढ़ रहस्यों को आधुनिक ध्वनि प्रभाव और संवेदनशील वाचन के माध्यम से जीवंत करेगी। इसमें होंगे ऋषि कागभुशुण्डि और गरुड़ जी के संवाद, जिनमें छिपे हैं अवतार, कर्म, माया, मृत्यु और मोक्ष के गूढ़ रहस्य। 🔊✨ 
    📌 इस सीरीज़ में क्या मिलेगा? 
    🔸 कालचक्र का रहस्य—अतीत, वर्तमान और भविष्य एक साथ कैसे जुड़े हैं? 
    🔸 भगवान राम के जीवन का अद्भुत व्याख्यान 
    🔸 कर्म और पुनर्जन्म की गहरी व्याख्या 
    🔸 भगवद भक्ति और ज्ञानमार्ग की अद्वितीय शिक्षा 
    🔸 मृत्यु, परलोक और मोक्ष के अनकहे रहस्य 
    🔸 ऋषियों और देवताओं के संवाद—सारगर्भित उपदेश 
    🎧 क्यों सुने यह ऑडियो सीरीज़? 
    ✅ पौराणिक ग्रंथों पर आधारित सटीक और प्रमाणिक कथा 
    ✅ आधुनिक कहानी कहने की शैली और ध्वनि प्रभाव 
    ✅ भक्ति, ज्ञान और ध्यान के लिए प्रेरणादायक 
    ✅ हिन्दू संस्कृति और सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर 
    🕉️ अमर कथा, अनंत ज्ञान, शाश्वत सत्य! 
    🙏 सनातन संस्कृति का गौरव, आत्मा का जागरण!
    Ver libro
  • दास्तान - ए - विकासनगर - cover

    दास्तान - ए - विकासनगर

    अश्विनी पराशर

    • 0
    • 0
    • 0
    औद्योगिक शहर ‘विकास नगर’ में विकास का एक नया मॉडल आया है। कंपनी का प्रोडक्शन कई गुना बढ़ा है, लेकिन यहाँ के बाशिंदों का जीवन गरीबी, बेरोजगारी और भूखमरी से बेहाल है। यह शहर एक नया इतिहास लिख रहा है। ‘विकास नगर’ के इतिहास की असेंबली लाईन से गुजरने वाले किरदारों की कहानियाँ बहुत दिलचस्प हैं। ये किरदार न केवल एक भौगोलिक क्षेत्र में साथ-साथ रहते हैं, बल्कि एक दूसरे पर निर्भर भी हैं और आपस में परिचित न भी हों तब भी एक ही आर्थिक और सामाजिक आबोहवा में सांसें लेते हैं। "दास्ताने विकास नगर" विकास के अनपेक्षित परिणामों और एक बदलते परिदृश्य में निवासियों के संघर्ष और विजय का दस्तावेज है।
    Ver libro
  • Kabhi Apne Liye - cover

    Kabhi Apne Liye

    पूनम अहमद

    • 0
    • 0
    • 0
    मुझे बचपन से आज तक एक ही शौक रहा है पढ़ना और बस पढ़ना, पढ़ते-पढ़ते ही कब लिखने भी लगी, पता ही नहीं चला। लिखने का सिलसिला शुरू होते ही आसपास के पात्र ही मेरे इर्द-गिर्द मंडराने लगे। कोई भी घटना,पात्र या विचार आते ही डायरी के पन्ने के साथ साथ मन के पन्नों पर भी लिखा जाता गया। मन के भाव धीरे धीरे अक्षरों के आकार लेने लगे, ऑब्जरवेशन से ही कहानियाँ बनने लगीं। दस तरह के लोगों से जो दस बातें सुनती हूँ, वही एक काल्पनिक पात्र के मुँह से उगलवा लेती हूँ। यह किताब छोटी कहानियों का एक छोटा सा संसार है, जहाँ हर सभी को अपने जीवन का एक अंश साँस लेता मिल जायेगमैं बहुत आम सी गृहिणी हूँ, मेरे पास राजनीतिक, सामाजिक,धार्मिक या कोई आर्थिक प्रभामंडल नहीं है, बस, थोड़े से शब्द हैं, शब्द ही मेरा साहस, मेरी ख़ुशी, मेरे सपने, सामर्थ्य हैं, यही शब्द शब्द जुड़कर मेरी कहानी बन जाते है। लेखन के माध्यम से लोगों के दिलों को छूना मुझे भाता है, लिखने में मुझे एक अलग ही आनंद आता है। कुछ पत्रिकाओं से बेस्ट स्टोरी का पुरस्कार भी मिला, अब तक करीब चार सौ कहानियां, कई लेख लिख चुकी हूँभाषा के मामले में मेरी सोच शुरू से ही एक जैसी है, भाषा ऐसी हो जो पाठक को सीधे कहानी के साथ जोड़ दे, बीच में रुकावट न बन खड़ी हो। सरल भाषा लिखना मुश्किल काम होता है इसी दिशा में मैंने हमेशा कोशिश की है। मेरी कहानियों के पात्र मेरे साथ बैठे होते हैं,मैं उन्हें लिखते हुए महसूस करती हूँ, उनकी कहानियां लिखते-लिखते कभी हँस देती हूँ, कभी रो भी पड़ती हूँ। इसी संकलन की कहानी, कब जाओगे प्रिय, लिखते-लिखते बहुत हँसी भी हूँ क्योकि मेरे पति भी टूर पर जाते रहते हैंमिनी की नई ईयर पार्टी में खुद को ‘बडी’ बनाकर लिखने में मुझे बहुत आनंद आया, बीच की दीवार में कितनी ही बार आँखें पोंछीं, कहानी 'आज की लड़की ' की खुशबू कोई काल्पनिक पात्र नहीं है। यह बहुत करीबी लड़की खुशबू जिसकी कहानी से मैं इतना प्रभावित हुई कि मैंने खुशबू का नाम भी नहीं बदला, इसकी कहानी ज्यूँ की त्यूँ पन्नों पर उतारती चली गयी। मेरी कहानियाँ पाठकों के मन को छू जाएँ तो मैं अपनी लेखनी को सार्थक समझूँगी।।
    Ver libro