¡Acompáñanos a viajar por el mundo de los libros!
Añadir este libro a la estantería
Grey
Escribe un nuevo comentario Default profile 50px
Grey
Suscríbete para leer el libro completo o lee las primeras páginas gratis.
All characters reduced
मुझे अपनी माँ से बहुत प्यार है I Love My Mom - हिन्दी - cover

मुझे अपनी माँ से बहुत प्यार है I Love My Mom - हिन्दी

Shelley Admont, KidKiddos Books

Editorial: KidKiddos Books

  • 0
  • 0
  • 0

Sinopsis

प्रत्येक व्यक्तिहमेशा अपनी माँ से प्यार करता है, चाहें वह कितनाभी बड़ा हो जाये।सोते समय बच्चों को सुनाने वाली इस कहानी में छोटा खरगोश जिम्मी और उसके बड़े भाई अपनी माँ के जन्मदिन के लिए एक बढ़िया उपहार ढूँढने में लगे हैं।वे उन्हें दिखाना चाहते हैं कि वे उन्हें कितना प्यार करते हैं।
 
अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उन्होंने अंत मेंक्या रास्ता ढूँढा? यह तो आपको खूबसूरत चित्रों से सजी इस मज़ेदार कहानी को पढ़ने के बाद ही पता चलेगा।
 
बच्चों की यह किताब सोते समय सुनाने वाली छोटी कहानियों के संग्रह का एक हिस्सा है।
Disponible desde: 25/03/2023.
Longitud de impresión: 34 páginas.

Otros libros que te pueden interesar

  • Abhinandan - cover

    Abhinandan

    डॉ. हरेंद्र प्रताप सिंह चौहान

    • 0
    • 0
    • 0
    यहाँ दिए गए सभी कविताएँ गहरी भावनाओं, सामाजिक चिंताओं और आध्यात्मिकता से भरी हुई हैं। हर कविता एक अलग संदेश देती है, चाहे वह जीवन का संघर्ष हो, रामराज्य की महिमा, नई पीढ़ी की बेबसी, या परिवार के रिश्तों की बदलती सच्चाई। 
    इन पंक्तियों में छुपा है समाज का यथार्थ, रिश्तों का ताना-बाना और रामराज्य की पुनर्स्थापना का उत्साह। हर कविता एक नई सोच, एक नया भाव लेकर आई
    Ver libro
  • 21 कविताएँ : यथार्थ एवं कल्पनाएँ - cover

    21 कविताएँ : यथार्थ एवं कल्पनाएँ

    डॉ.राजा दिक्षित

    • 0
    • 0
    • 0
    प्रस्तुत पुस्तक यथार्थ एवं कल्पनाओं का मिश्रण है | इस पुस्तक में मानवीय मूल्यों को प्रदर्शित किया गया है तथा 21 कविताओं के माध्यम से जीवन के अनेक पहलुओं को छूने का प्रयास है | एक और पुराने समय को जीने की कोशिश है तो दूसरी और भविष्य के लिए संदेश है | कविताओं को इंद्रधनुषी सतरंग प्रदान करने का प्रयास किया गया है |अगर हमारे विचार आपको पसंद आते हैं तो पुस्तक को पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा | आपका प्रोत्साहन अगली पुस्तक हेतु संजीविनी का कार्य करेगा | सम्पूर्ण विश्व की मंगल कामना के साथ सभी को हाथ जोड़ कर प्रणाम |
    Ver libro
  • Saahi & Sudheer - cover

    Saahi & Sudheer

    Yogita Warde

    • 0
    • 0
    • 0
    "साही '&' सुधीर" दोस्ती, प्रेम और आकर्षण पर आधारित उपन्यास है। यह उपन्यास सभी पीढ़ियों को अपने समय, जीवन और कहानी से वाकिफ कराता है, यह एक प्यारी-सी कहानी है जिसमें साही और सुधीर बचपन के दोस्त हैं। सुधीर पेंटिंग बनाता है और साही लेखिका है, जब साही सुधीर के जीवन में आयी तब उसने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन कुछ समय बाद सुधीर और साही दोनों को एहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है। 
    फिर क्या होता है? क्या वे फिर कभी मिलेंगे? क्या वे अपने प्यार का इजहार करेंगे? क्या पेंटिंग और लेखन दोनों का आपस में जुड़ पाते हैं? ऐसे बहुत से सवाल हैं और जवाब के लिए आपको "साही '&' सुधीर" उपन्यास पढ़ना होगा। 
    यह उपन्यास आपके दैनिक जीवन के साथ आसानी से जुड़ सकता है। इस उपन्यास में स्कूली जीवन, दोस्ती और अलगाव के कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं जो हर किसी को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि अब आगे क्या होगा। 
    हिंदी साहित्य में लेखिका की यह सर्वश्रेष्ठ पहली रचना है एक परिपक्व कलम आपकी समीक्षाओं के साथ-साथ आलोचना की भी प्रतीक्षा कर रही है, ताकि अगले उपन्यास में आपके सामने और बेहतर काम किया जा सके।
    Ver libro
  • दूर कहीं बजती धुन बांसुरी की - cover

    दूर कहीं बजती धुन बांसुरी की

    कमल कुमार नागर

    • 0
    • 0
    • 0
    डॉक्टर वत्सला की कविताओं का संग्रह दूर कहीं बजती धुन बांसुरी की सुनिए मृद्वीका के साथ
    Ver libro
  • Pachchtava - cover

    Pachchtava

    Dharmendra Mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    Story Summery: 
    विदूषक ने दोस्त सम्पाती का साथ छोड़ दिया और इंसानों की बस्ती की ओर चल पड़ा। वहाँ चारों ओर हरे-भरे पेड़, स्वादिष्ट फल और रंग-बिरंगे बाग़-बग़ीचे थे। विदूषक को लगा – यही तो असली सुख है! 
    लेकिन जिन बंदरों के साथ वह पहुँचा था, वे पहले से इंसानों की चालाकियों से परिचित थे। वे सब तो सुरक्षित निकल गए, मगर बेचारा विदूषक फँस गया। इंसानों ने डंडों और लाठियों से उस पर हमला कर दिया। उसका पैर टूट गया। 
    अब न तो दोस्त रहे और न ही जीने का सहारा… अकेला विदूषक एक वृक्ष के खोखल में पड़ा अपनी आख़िरी साँसों की प्रतीक्षा करने लगा।
    Ver libro
  • Maila Aanchal - Phanishwar Nath Renu - मैला आँचल - फणीश्वरनाथ रेणु - cover

    Maila Aanchal - Phanishwar Nath...

    Phanishwar Nath Renu

    • 0
    • 0
    • 0
    ‘मैला आँचल’ हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी बिहार के एक पिछड़े ग्रामीण अंचल को पृष्ठभूमि बनाकर रेणु ने इसमें वहाँ के जीवन का, जिससे वह स्वयं ही घनिष्ट रुप से जुड़े हुए थे, अत्यन्त जीवन्त और मुखर चित्रण किया है। 
    ‘मैला आँचल’ का कथानक एक युवा डॉक्टर है जो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद पिछड़े गाँव को अपने कार्य-क्षेत्र के रुप में चुनता है, तथा इसी क्रम में ग्रामीण जीवन के पिछड़ेपन, दुःख-दैन्य, अभाव, अज्ञान, अन्धविश्वास के साथ-साथ तरह-तरह के सामाजिक शोषण-चक्रों में फँसी हुई जनता की पीड़ाओं और संघर्षों से भी उसका साक्षात्कार होता है। कथा का अन्त इस आशामय संकेत के साथ होता है कि युगों से सोई हुई ग्राम-चेतना तेजी से जाग रही है। 
    कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की इस युगान्तकारी औपन्यासिक कृति में कथाशिल्प के साथ-साथ भाषाशिल्प और शैलीशिल्प का विलक्षण सामंजस्य है जो जितना सहज-स्वाभाविक है, उतना ही प्रभावकारी और मोहक भी। 
    फणीश्वरनाथ रेणु जन्म : 4 मार्च, 1921; जन्म-स्थान : औराही हिंगना नामक गाँव, ज़िला पूर्णिया (बिहार)। हिन्दी कथा-साहित्य में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण रचनाकार। दमन और शोषण के विरुद्ध आजीवन संघर्ष। राजनीति में सक्रिय हिस्सेदारी। 1942 के भारतीय स्वाधीनता-संग्राम में एक प्रमुख सेनानी। 1950 में नेपाली जनता को राणाशाही के दमन और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए वहाँ की सशस्त्र क्रान्ति और राजनीति में योगदान। 1952-53 में दीर्घकालीन रोगग्रस्तता। इसके बाद राजनीति की अपेक्षा साहित्य-सृजन की ओर अधिकाधिक झुकाव। 1954 में बहुचर्चित उपन्यास ‘मैला आँचल’ का प्रकाशन। कथा-साहित्य के अतिरिक्त संस्मरण, रेखाचित्र और रिपोर्ताज़ आदि विधाओं में भी लिखा। व्यक
    Ver libro