Rekhte ke Ustad : Bashir Badra
Rekhta
Narrador Abhishek Shukla
Editora: Storytel Original IN
Sinopse
ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है अभी तुझ से मिलता-जुलता कोई दूसरा कहाँ है क़ुदरत ख़ूबसूरत है और ख़ौफ़नाक है; ये बात घर में आग लगाने वालों को समझ में नहीं आती। हुआ यूं कि क़ौमी दंगे में बशीर बद्र के घर को आग के हवाले कर दिया गया । उस दौरान ऐसा बहुत कुछ जलकर राख हो गया जो इंसान के काम आ सकता था मगर इश्क़-नगर में ग़ुस्से का रिवाज नहीं है। मुहब्बत ने सब्र किया और बशीर बद्र ने शेर कहे । 1999 में बशीर बद्र को पद्मश्री से नवाज़ा गया। Written by Mohd Aqib
Duração: 34 minutos (00:34:03) Data de publicação: 13/09/2021; Unabridged; Copyright Year: 2021. Copyright Statment: —

