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तक बचे हुए लोग - cover
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तक बचे हुए लोग

फिलिप जी हेनले

Editora: Babelcube

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Sinopse

यूरोप की सरकारों के पास संकट पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं थी क्योंकि किसी को भी इसका कारण नहीं पता था या यह कैसे फैला था।  1348 में, प्लेग इतनी तेजी से फैला कि इससे पहले कि किसी भी चिकित्सक या सरकारी अधिकारियों को इसकी उत्पत्ति पर विचार करने का समय मिलता, लगभग एक तिहाई यूरोपीय आबादी पहले ही नष्ट हो चुकी थी।  भीड़-भाड़ वाले शहरों में, पचास प्रतिशत से अधिक आबादी का मरना असामान्य नहीं था।  पृथक क्षेत्रों में रहने वाले यूरोपीय लोगों को कम नुकसान उठाना पड़ा, और मठों और पुजारियों को विशेष रूप से अधिक नुकसान हुआ क्योंकि वे ब्लैक डेथ के पीड़ितों की देखभाल करते थे। 
Disponível desde: 12/01/2024.
Comprimento de impressão: 255 páginas.

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    The story follows a man caught between forbidden love and cultural values, leading to a deep internal conflict that resonates with listeners even today. Manto’s masterful narration brings out emotional vulnerability, passion, and introspection, making this short story not only relatable but also hauntingly powerful. 
    This Hindi audiobook preserves Manto’s intense narrative style while making it accessible to modern listeners. If you are a fan of Urdu literature, emotional stories, or classic Hindi audiobooks, Chaudhvin Ka Chand is a must-listen. 
    लेखक के बारे में:  
    सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955)  
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    वह प्रसिद्ध उर्दू कहानीकार थे। उनकी कहानियाँ हैं ; टोबा टेक सिंह, बू, ठंडा गोश्त, खोल दो । मंटो के बाईस कहानी संग्रह, पाँच रेडियो नाटक संग्रह, एक उपन्यास, तीन निजी स्कैच संग्रह और तीन लेख संग्रह छपे हैं। उनकी रचनायें हैं: आतिशपारे; मंटो के अफसाने; धुआँ; अफसाने और ड्रामे; लज्जत-ए-संग; सियाह हाशिए; बादशाहत का खात्मा; खाली बोतलें खाली डिब्बे; लाउडस्पीकर (सकैच); ठंडा गोश्त; सड़क के किनारे; यज़ीद; पर्दे के पीछे; बगैर उन्वान के; बगैर इजाजत; बुरके; शिकारी औरतें; सरकंडों के पीछे; शैतान; ‘रत्ती, माशा, तोला’; काली सलवार; नमरूद की ख़ुदायी, गंजे फ़रिशते (सकैच), मंटो के मज़ामीन, सड़क के किनारे, मंटो की बेहतरीन कहानियाँ।
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    इंतज़ार - डा० पुष्पा सक्सेना की लिखी कहानी - Intzaar - A Story by Dr. Pushpa Saxena 
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    🔹 इस कहानी में: इंतज़ार की गहराई और उसकी पीड़ा। 
    प्रेम और रिश्तों की कोमलता। 
    जीवन के निर्णयों का प्रभाव। 
    एक महिला के संघर्ष और धैर्य की मार्मिक कथा। 
    🖋️ लेखक: डॉ. पुष्पा सक्सेना  
    📚 श्रेणी: हिंदी साहित्य | 
    सामाजिक कथा | 
    भावनात्मक कहानी 
    🎙️ इस दिल को छू लेने वाली कहानी को सुनें और महसूस करें इंतज़ार का असली अर्थ। 
    पुष्पा सक्सेना का जन्म 20 अगस्त 1926 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। वे हिंदी साहित्य की जानी-मानी लेखिका थीं, जिन्होंने कहानियों, निबंधों और उपन्यासों के माध्यम से समाज की गहरी समझ प्रस्तुत की। उनकी रचनाएँ महिलाओं के जीवन, उनकी समस्याओं और समाज में उनकी स्थिति को प्रभावशाली ढंग से चित्रित करती हैं। 
    उनकी प्रमुख कृतियों में "प्रतिदान," "अधूरी तस्वीर," और "परिवर्तन" शामिल हैं। पुष्पा सक्सेना ने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया और साहित्य के माध्यम से सामाजिक सुधार की बात की। उनका निधन 15 फरवरी 2004 को हुआ। उनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य की धरोहर के रूप में सदैव याद की जाती रहेंगी।
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  • Poos Ki Raat - Munshi Premchand - पूस की रात - मुंशी प्रेमचंद - cover

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    Munshi Premchand

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    पूस की रात 
    मुंशी प्रेमचंद की यह कहानी हल्कू नाम के किसान की कहानी है। इस कहानी के माध्यम से कहानीकार ने उस दौरान के किसान की स्थिति की विवेचना की है। उनकी दयनीय स्थिति का चित्रण इस कहानी में इतना सटीक है कि आपकी आंखें नम हो जाएंगी।कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद  
    कलम के जादूगर प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी बड़े ही ध्यान और सम्मान के साथ सुनी जाती हैं। आज हम लेकर आए हैं प्रेमचंद की वो कहानियाँ जो उनके कथा संकलन ‘मान सरोवर’ से ली गई हैं। प्रेमचंद की कहानियाँ अपने समय की हस्ताक्षर हैं जिनमें आप तब के परिवेश और समाज को भी बखूबी समझ सकते हैं। यूं तो मुंशी जी ने अपनी कहानियाँ हिंदी में ही लिखी हैं फिर भी हमारा ये प्रयास है की उनकी कहानियाँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और इसलिए हमने उन्हें थोड़ी और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इन कहानियों को ख़ास आपके लिए तैयार किया है। तो आइए सुनते हैं प्रेमचंद की विश्व प्रसिद्ध कहानियाँ!
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  • दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - Dand - Munshi Premchand Ki Kahani - cover

    दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी -...

    Munshi Premchand

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    दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Dand - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दण्ड' अन्याय, समाज की कठोर सच्चाई और इंसानी संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे समाज में दोष और सजा के बीच एक गहरी खाई मौजूद है, और इंसान अपने कर्मों के दण्ड को कैसे झेलता है।  
    प्रेमचंद की यह कृति न्याय, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय कमजोरियों पर प्रकाश डालती है। 'दण्ड' न केवल समाज की विद्रूपताओं को सामने लाती है, बल्कि न्याय के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करती है। 
     🔸 कहानी का नाम: दण्ड  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, भावनात्मक  
    🔸 मुख्य विषय: अन्याय, दण्ड, और सामाजिक न्याय  
    🔸 मुख्य पात्र: पीड़ित और समाज के विभिन्न वर्ग  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    न्याय और अन्याय का संघर्ष  
    सामाजिक व्यवस्था और उसकी कठोरता 
    प्रेमचंद की गहरी सामाजिक दृष्टि  
    मानवीय संवेदनाओं का चित्रण 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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