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भाग्य ट्विस्टर - वेन गैम की कहानी - cover

भाग्य ट्विस्टर - वेन गैम की कहानी

Owen Jones

Traductor Maya Mehra

Editorial: Tektime

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Sinopsis

वेन का जन्म उत्तरी वेल्स के एक सुदूर खेत में एक जंगली, तूफानी रात में हुआ था। परिवार चाहता था कि उसकी डिलीवरी अस्पताल में हो क्योंकि वह बड़ा होने वाला था और ग्विनेड का पहला बच्चा था, लेकिन उसकी माँ और दादी रियानोन ने सोचा कि यह बहुत खतरनाक हो सकता है। परिवार की बाइबिल के अनुसार, उनके सभी परिवार 324 वर्षों के लिए फार्म, द ड्रैगन्स गार्डन में पैदा हुए थे - और वे सभी या तो चुड़ैल या जादूगर थे ...
Disponible desde: 30/06/2023.
Longitud de impresión: 553 páginas.

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    Sarat Chandra Chattopadhyay

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    Charitraheen - Sarat Chandra Chattopadhyay - चरित्रहीन - शरतचंद्र चट्टोपाध्याय 
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    Unmaad - Munshi Premchand Ki...

    Munshi Premchand

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    उन्माद - मुंशी प्रेमचंद की रहस्यमयी कहानी - Unmaad - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'उन्माद' मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विषयों को गहराई से छूने वाली एक अनोखी रचना है। यह कहानी मानवीय मन की जटिलताओं, भ्रम और वास्तविकता के बीच के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। 
    'उन्माद' में प्रेमचंद ने समाज और व्यक्तित्व के बीच के तनाव, भावनात्मक उथल-पुथल और मानसिक स्थिति का अत्यंत संवेदनशील चित्रण किया है। यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि जब भावनाएँ और वास्तविकता टकराते हैं तो क्या होता है। इसे जरूर सुनें और इस अद्भुत कथा का आनंद लें। 
    🔸 कहानी का नाम: उन्माद  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: मनोवैज्ञानिक, सामाजिक 🔸 
     मुख्य विषय: मानसिक उथल-पुथल, सामाजिक संघर्ष  
    🔸 मुख्य पात्र: उन्माद से जूझता व्यक्ति  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    मानवीय मनोविज्ञान की जटिलता  
    भ्रम और वास्तविकता का संघर्ष  
    मानसिक स्थिति और सामाजिक दबाव  
    मुंशी प्रेमचंद की गहन लेखनी 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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    R. R.K.Narayan

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    Kulhadi - Malgudi Days by R. K. Narayan – कुल्हाड़ी - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण 
    “Kulhadi” is a touching Hindi audiobook story from R. K. Narayan’s Malgudi Days, where a poor gardener named Velan witnesses fate, prophecy, and time shape his life around a grand bungalow. A tale of struggle, destiny, and silent resilience — perfect for listeners who love reflective and emotional stories with deeper meaning. 
    "एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी कि वेलन एक तीन-मंज़िला घर में रहेगा। वेलन अपने गाँव के सबसे गरीब परिवार से था। 18 साल की उम्र में सबके सामने अपने पिता से थप्पड़ खाने के बाद उसने गाँव छोड़ दिया। कुछ दिनों तक भीख मांगने के बाद, एक बूढ़े व्यक्ति ने उसे माली की नौकरी दी। उस व्यक्ति ने अपनी बड़ी सी ज़मीन पर एक तीन-मंज़िला बंगला बनवाया था। लेकिन वेलन, बंगले के पास की झोपड़ी में रहता था। बंगले के निर्माण से प्रभावित, वह एक मार्गोसा के तने को पकड़ता है और उसे जल्दी-जल्दी बंगले के समान उगने के लिए कहता है। मार्गोसा अच्छे से विकसित होता है। उसके मालिक के पोते पेड़ के नीचे खेलते हैं और सैकड़ों पक्षी उस पर रहते हैं। एक दिन वेलन के मालिक की मृत्यु हो जाती है। फिर कुछ वर्षों तक घर में परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं, और एक दिन वे भी घर की चाबियां वेलन को देकर चले जाते हैं। कुछ साल बाद, एक आदमी आकर कहता है कि उसने वह ज़मीन खरीद ली है और अब वह वहां पर तोड़-फोड़ शुरू करने वाला है। लेखक आर. के. नारायण 
    “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
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    वेश्या - मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानी - Veshya - A Story by Munshi Premchand 
    "वेश्या" मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है जो समाज के दकियानूसी सोच, नैतिकता, और मानवता के सवालों पर प्रकाश डालती है। यह कहानी उन लोगों की जीवन परिस्थितियों को दर्शाती है जिन्हें समाज ने हाशिए पर डाल दिया है।  
    🔸 कहानी का नाम: वेश्या  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 मुख्य विषय: समाज की नैतिकता और इंसानियत  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    सामाजिक व्यवस्था और हाशिए पर रहने वाले लोगों का जीवन  
    मानवता और सहानुभूति के प्रश्न  
    समाज की दृष्टि और उसके प्रभाव  
    यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी नैतिकता और न्याय प्रणाली का असली अर्थ क्या है। मुंशी प्रेमचंद की यह अमूल्य रचना आपको मानवीय संवेदनाओं के करीब लाएगी। इसे सुनें और सोचें। 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी और उर्दू साहित्य के एक महान लेखक थे। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन वे प्रेमचंद के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं और संघर्षों को उजागर किया।  
    प्रेमचंद की प्रमुख कृतियों में 'गोदान', 'गबन', 'निर्मला', 'सेवासदन', 'रंगभूमि' और 'कफन' शामिल हैं। उनकी कहानियाँ और उपन्यास समाज के निम्न और मध्यम वर्ग की जिंदगी की सजीव तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। वे सामाजिक न्याय, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के पक्षधर थे। प्रेमचंद का साहित्य सरल भाषा, मार्मिक शैली और यथार्थवादी दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी और इसे जनसाधारण के करीब लाया। 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनका साहित्य आज भी प्रेरणादायक है और हिंदी साहित्य का अमूल्य हिस्सा है।
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  • दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - Dand - Munshi Premchand Ki Kahani - cover

    दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी -...

    Munshi Premchand

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    दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Dand - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दण्ड' अन्याय, समाज की कठोर सच्चाई और इंसानी संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे समाज में दोष और सजा के बीच एक गहरी खाई मौजूद है, और इंसान अपने कर्मों के दण्ड को कैसे झेलता है।  
    प्रेमचंद की यह कृति न्याय, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय कमजोरियों पर प्रकाश डालती है। 'दण्ड' न केवल समाज की विद्रूपताओं को सामने लाती है, बल्कि न्याय के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करती है। 
     🔸 कहानी का नाम: दण्ड  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, भावनात्मक  
    🔸 मुख्य विषय: अन्याय, दण्ड, और सामाजिक न्याय  
    🔸 मुख्य पात्र: पीड़ित और समाज के विभिन्न वर्ग  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    न्याय और अन्याय का संघर्ष  
    सामाजिक व्यवस्था और उसकी कठोरता 
    प्रेमचंद की गहरी सामाजिक दृष्टि  
    मानवीय संवेदनाओं का चित्रण 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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  • Khujli-Mujli-Kids Fantasy & Story Planet - Episod-5 - cover

    Khujli-Mujli-Kids Fantasy &...

    Dharmendra Mishra

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    Khujli-Mujli-Kids Fantasy & Story Planet🎧 बच्चों के लिए एक ऐसी ऑडियोबुक जो उन्हें हीरो बना देगी! 
    क्या आपका बच्चा भी बाकी बच्चों जैसा ही है? अगर हाँ, तो उसे मिलाइए खुजली और मुजली से! ये दो बच्चे कोई साधारण बच्चे नहीं, बल्कि उनके पास है एक असाधारण माइंड सुपरपावर! 
    ना कोई जादू, ना कोई मंत्र, बस आत्मबल और समझदारी की कहानी जो सिखाएगी कि सच्ची शक्ति हमारे अंदर ही होती है। 
    इस ऑडियोबुक में क्या है ख़ास? 
    प्रेरणादायक कहानी: खुजली एक डरा हुआ और मुजली एक उपेक्षित लड़का, पर जब ये साथ आते हैं तो सबकी सोच बदल देते हैं। 
    मज़ेदार क्विज़ और सीख: कहानी के साथ-साथ ऐसे क्विज़ जो बच्चों के दिमाग को तेज़ बनाएंगे। 
    आसान भाषा और प्यारी आवाज़: इस ऑडियोबुक को सुनने में बहुत मज़ा आएगा। 
    लेखक: जाने-माने बाल साहित्यकार धर्मेंद्र मिश्रा की अनोखी पेशकश। 
    यह ऑडियोबुक सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए है जो अपने अंदर की शक्ति को पहचानना चाहते हैं।
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