भाषाओं का एटलस
Murat Uzun
Editora: Murat Uzun CBT-52
Sinopse
भाषाओं का एटलसमनुष्य ने बोलने से पहले महसूस किया।और कुछ भावनाएँ शब्दों से भी पुरानी थीं।भाषाओं का एटलस भाषाओं के बनने का इतिहास बताने के लिए नहीं,बल्कि यह दिखाने के लिए लिखा गया कि मनुष्य ने स्वयं को कैसे व्यक्त किया।यह पुस्तक शब्दों की उत्पत्ति नहीं, अर्थ की यात्रा का अनुसरण करती है।यह मानवता की स्मृति है, जो घास के मैदानों से समुद्रों तक, महाद्वीप से महाद्वीप तक फैली हुई है।अरबी, तुर्की, चीनी, लैटिन, स्वाहिली और अनेक अन्य...इन पन्नों में भाषाएँ केवल जानकारी नहीं, बल्कि अस्तित्व का एक रूप हैं।कोई भी श्रेष्ठ नहीं।कोई भी अधूरा नहीं।क्योंकि हर भाषा, समझे जाने का मानव प्रयास है।यह पुस्तक हमें यह याद नहीं दिलाती कि हम कौन सी भाषा बोलते हैं,बल्कि यह कि हम क्यों बोलते हैं।
