Junte-se a nós em uma viagem ao mundo dos livros!
Adicionar este livro à prateleira
Grey
Deixe um novo comentário Default profile 50px
Grey
Assine para ler o livro completo ou leia as primeiras páginas de graça!
All characters reduced
सितारों के नीचे - cover
LER

सितारों के नीचे

Sam Sagolski, KidKiddos Books

Editora: KidKiddos Books

  • 0
  • 0
  • 0

Sinopse

गर्मी की छुट्टियाँ हैं, और मार्क एक बड़े साहसिक अभियान का इंतज़ार कर रहा है! मगर जब उसके मम्मी और पापा यह घोषणा करते हैं कि इस बार उनका परिवार एक कैम्पिंग ट्रिप पर जा रहा है, तो वह घबरा जाता है। क्या मार्क अंधेरे से अपने डर पर क़ाबू पा सकेगा और इस सफ़र का आनंद ले पाएगा?
Disponível desde: 02/05/2023.
Comprimento de impressão: 34 páginas.

Outros livros que poderiam interessá-lo

  • Mrigtrishna - cover

    Mrigtrishna

    सम्राट केतन शर्मा

    • 0
    • 0
    • 0
    मृगतृष्णा एक वैज्ञानिक प्रोफेसर हंस गंगवार की कहानी है। यह प्रोफेसर एड्स की रामबाण दवाई की खोज कर रहे हैं। उपन्यास के शुरू में ही प्रोफेसर की हत्या हो जाती है। इनकी हत्या की जांच मनोज मिंथ और राजीव राय करते हैं। यही तीनों प्रोफेसर हंस गंगवार , मनोज मिंथ और राजीव राय इस उपन्यास के मुख्य पात्र हैं। अन्य पात्रों में इंस्पेक्टर अजीत महानवे , इंस्पेक्टर अतुल सचान , मंत्री अमजद इस्लाम आदि मुख्य हैं। उपन्यास में जबरदस्त रहस्य और रोमांच है। पूरे उपन्यास में अगर एक बार पढ़ना शुरू करो तो फिर किताब अंत तक छोड़ी नही जाती। उपन्यास में लेखक ने विज्ञान गल्प का भी सहारा लिया है। मृगतृष्णा का सामाजिक संदेश उच्च कोटि का है। कथा के ऊपरी स्ट्रक्चर के साथ साथ मृगतृष्णा अपनी गहराई में बड़े सामाजिक सत्यों और राजनीतिक सत्यों को बाहर लेकर आती है।यह एक पढ़ने लायक प्यारा उपन्यास है।
    Ver livro
  • Miracle of Gratitude The (Hindi) - cover

    Miracle of Gratitude The (Hindi)

    Sirshree

    • 0
    • 0
    • 0
    The Glory of Thankfulness 
    जहाँ कृतज्ञता होती है, 
    वहाँ प्रकृति की महिमा खिल उठती है… 
    किसी के प्रति आभार प्रकट करने के लिए हम धन्यवाद, शुक्रिया, थैंक्यू, आभार आदि शब्दों का प्रयोग करते हैं। दरअसल ‘धन्यवाद’ यह शब्द एक छोटी सी चुंबकीय प्रार्थना है। जिसे अलग-अलग भाषाओं में, अलग-अलग तरह से कहा जाता है। धन्यवाद कहते ही कुदरत की सुंदरता और उसकी शक्तियाँ हमारे आस-पास जीवित हो जाती हैं। हमें कुदरत के अद्भुत चमत्कारों को देखने का अवसर मिलता है। 
    अब सवाल यह उठता है कि क्या कुदरत को सभी भाषाओं का ज्ञान है? अगर वह भाषा ही सुन रही होती तो क्या होता? कैसे सभी का हिसाब-किताब रखती? मगर ऐसा नहीं है! कुदरत भाषा नहीं, भाव तरंग समझती है। 
    कुदरत में आपके द्वारा कहे गए शब्द नहीं, आपकी भावना पहुँचती है और वह कार्य करती है। जैसे- जब आपको कोई चीज़ जो आप चाहते थे, वह मिल जाती है तो उसके लिए आप धन्यवाद कहते हैं यानी आप ‘है’ की फीलिंग में हैं। इसी प्रकार जो चीज़ आपके पास नहीं है और आप उसे पाना चाहते हैं तो उसके लिए भी जब आप धन्यवाद देते हैं तब यूनिवर्स आपके कहे शब्दों पर नहीं बल्कि ‘है’ की फीलिंग को जान रही होती है। यह कुदरत के देने का रहस्य है। यही ग्लोरी ऑफ थैंकफुलनेस यानी कृतज्ञता की महिमा है। 
    इसे समझकर यदि हम कृतज्ञता के साथ कुदरत संग तालमेल बिठाते हैं तो जीवन की धारा हमें खुशी और संतोष की ओर बड़ी सरलता से ले जाती है।
    Ver livro
  • धागे मोह के - cover

    धागे मोह के

    संजय सोनावणी

    • 0
    • 0
    • 0
    स्नेहा सिंह की काव्य संग्रह "धागे मोह के " सुनिए नेहा के साथ
    Ver livro
  • एक्ने का उपचार‎ - cover

    एक्ने का उपचार‎

    Owen Jones

    • 0
    • 0
    • 0
    एक्ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों की समस्या है, और उनमें से अधिकांश लोग युवा हैं और इस उलझन, ‎और यहां तक कि अपराधबोध और शर्म से निपटने के लिए भावनात्मक रूप से तैयार नहीं होते हैं, और ‎अक्सर उन्हें इस बारे में सताया भी जाता है, अक्सर एक्ने के प्रकोप के साथ यह सब भी जुड़ा हुआ होता ‎है। इस पुस्तिका में निहित ज्ञान आपको एक्ने से निपटने में मदद करेगा। ‎
    Ver livro
  • अफसर के रिटायरमेंट का दर्द - cover

    अफसर के रिटायरमेंट का दर्द

    धोंडो केशव कर्वे

    • 0
    • 0
    • 0
     व्यंग्य लेखन से मेरा उद्देश्य लोगों का मजाक उड़ाकर उन्हें हँसी का पात्र बनाकर सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करना नही है ।  
    समाज में कुछ ऐसी बातें व्याप्त है, जो आम आदमी ठगे जाने के बाद भी समझ नहीं पाता है और दिन प्रतिदिन पिसता जाता है ।  
    ऐसी बातों को अपने लेखों ओैर व्यंग्यों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना ही मेरा उद्देश्य रहा है ।  
        इसके अलावा ऐसे लोगों को भी दर्पण दिखाना रहा है जो छल कपट चोरी ,बेईमानी करने के बाद भी समझते है कि उन्होने कुछ नहीं किया है और उनके बारे में लोगों को कुछ नहीं मालूम है, जबकि समाज में इसके विपरीत उल्टा असर रहता है ।  
        हमारा भारतीय समाज दहेज प्रथा, जातिप्रथा, धार्मिकता, अंधविश्वास, गरीबी, बेकारी आदि आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, बुराईयों से ग्रस्त है,  
    जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित, देश का आम आदमी है और आम आदमी को ही अपने लेखों का नायक बनाकर प्रायः व्यंग्य लिखे गये हैं । जिसमें अधिक से अधिक समस्याओं को हल सहित उठाये जाने का प्रयास किया गया हैं। 
        आस पास में व्याप्त विषमताओं चेहरे पर चेहरे लगाये, रंग बदलते चेहरे को देखकर उन्हें सरल सीधे शब्दो में बिना लाग लपेट के व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है  
    और व्यंग्य ही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा अपने और अपनो पर चोट करके लोगो को समझाया जा सकता है ।
    Ver livro
  • प्रेम के रंग होली के संग - cover

    प्रेम के रंग होली के संग

    Neera K. Loveolyn

    • 0
    • 0
    • 0
    "प्रेम के रंग, होली के संग" – इस कविता में कवियित्री "नीरा क. लवओलिन" ने प्रेम के विविध रंगों को बखूबी संजोया है। होली के रंगों के साथ प्रेयसी अपने प्रेमी के हर रंग में रंगना चाहती हैI हर रंग प्रेम की एक अनोखी अनुभूति, समर्पण और मिलन की गहराइयों को दर्शाता है—चाहत की लाली, विरह की नीलिमा, समर्पण की शुद्धता और प्रेम की अनंतता।  
    यह सिर्फ एक कविता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी अभिव्यक्ति है जिसमें रूह हर रंग को अपने में समाहित कर लेती है और प्रेम ही एकमात्र सच्चाई बन जाता है। 
    आप निश्चय ही इस कविता को पढ़कर भावविभोर हो उठेंगे और प्रेम के अलौकिक जादू में खो जाएँगे।
    Ver livro