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मेरा भाग्यशाली पैसा - cover
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मेरा भाग्यशाली पैसा

जयंत नारळीकर

Editora: Babelcube

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Sinopse

न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्टसेलिंग लेखक जिल बार्नेट की ओर से 19वीं सदी के अंत में न्यूयॉर्क शहर में सबसे यादगार मौसम--क्रिसमस- के दौरान सेट की गई एक नई, आकर्षक प्रेम कहानी। जब प्रसिद्ध वास्तुकार, एडवर्ड लोवेल अचानक अपनी 4 साल की अनाथ भतीजी के संरक्षक बन जाते हैं, तो उनका जीवन उल्टा हो जाता है। उसकी भतीजी दुःखी है और जब वह एक दुकान की खिड़की में एक गुड़िया देखती है, तो वह उसकी आँखों में खुशी के पहले लक्षण देखती है। लेकिन गुड़िया को एडवर्ड के खरीदने से पहले ही बेच दिया जाता है और वह इस उम्मीद में गुड़िया निर्माता को खोजने के लिए निकल पड़ता है कि वह उसकी युवा भतीजी को ठीक करने का तरीका खोजने में मदद कर सकती है।
Disponível desde: 18/07/2023.
Comprimento de impressão: 108 páginas.

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    निर्मला - मुंशी प्रेमचंद की अमर उपन्यास | Nirmala - Munshi Premchand Ki Amar Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद का कालजयी उपन्यास 'निर्मला' भारतीय समाज में नारी जीवन, दहेज प्रथा, और पारिवारिक जटिलताओं का मार्मिक चित्रण करता है। यह कहानी एक ऐसी लड़की की है, जिसे समाज की रूढ़ियों और परंपराओं के कारण अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 
    'निर्मला' केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि यह समाज को आईना दिखाने वाली रचना है, जिसमें प्रेमचंद ने नारी के संघर्ष, उसकी विवशता, और उसकी गरिमा को बेहद संवेदनशीलता के साथ उकेरा है। इस उपन्यास के पहले चार भाग सुनें और जानें निर्मला की जीवन यात्रा। 
    मुंशी प्रेमचंद का उपन्यास 'निर्मला' भारतीय समाज की रूढ़ियों, दहेज प्रथा, और नारी जीवन के संघर्ष का अमूल्य दस्तावेज है। इस उपन्यास में निर्मला की जीवन यात्रा और भी पेचीदा हो जाती है, जहां परिवार के भीतर के जटिल संबंध और सामाजिक बाधाएं उसकी स्थिति को और अधिक संवेदनशील बनाती हैं। 
    जानें, कैसे निर्मला अपने आत्मसम्मान और मानवीय भावनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है। 
    🔸 उपन्यास का नाम: निर्मला  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, भावनात्मक  
    🔸 मुख्य विषय: दहेज प्रथा, नारी जीवन, समाज की रूढ़ियाँ  
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    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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