Gandhi Ki Jeevan Kahani
Alok Shrivastava
Narrador Atul Kapoor
Editorial: Storyside IN
Sinopsis
आइन्सटीन ने कहा था कि आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल होगा कि हाड़-माँस का ऐसा भी कोई शख़्स इस धरती पर कभी चला था. गाँधी अपने जीते-जी किंवदंति हो गये थे. पर यह बात विचित्र है कि भारत ने बस उनका नाम याद रखा, उनकी ज़िंदगी के संघर्ष, उनके मूल्यों, विचारों से वह खुद को लगातार दूर करत चला गया. आज इस बात की सख़्त ज़रूरत है कि गाँधी को फिर से तलाशा जाये. यह किताब उसी तलाश का और गाँधी के जीवन का एक संक्षिप्त, लेकिन क़रीबी लेखा-जोखा है.
Duración: alrededor de 2 horas (01:41:58) Fecha de publicación: 15/08/2020; Unabridged; Copyright Year: 2020. Copyright Statment: —

