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कुछ रंग इज़हार इन्कार इन्तज़ार के! - cover

कुछ रंग इज़हार इन्कार इन्तज़ार के!

Surjeet Kumar

Verlag: Surjeet Kumar

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Beschreibung

ज़िंदगी अनेक खूबसूरत रंगों का संगम है, जिसका सब से सुंदर रंग है, प्यार! प्यार कभी भी किसी से भी हो सकता है, चाहे वो सपनो में आये साथी से हो, विवाह के बाद जीवनसाथी से हो या फिर पहली नज़र वाला प्यार हो। जब तक इसमें रूठना, मनाना, इज़हार, इंकार, इंतज़ार आदि की बातें ना हो, कुछ ना कुछ अधूरा सा लगता है । इन्ही सब एह्सासों को अलग-अलग शीर्षकों और कही-कही एक ही शीर्षक में इन सब एहसासो को एक ही कविता में बांधने की कोशिश करती है, ये किताब ।
Verfügbar seit: 15.06.2022.
Drucklänge: 55 Seiten.

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    कलम के जादूगर प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी बड़े ही ध्यान और सम्मान के साथ सुनी जाती हैं। आज हम लेकर आए हैं प्रेमचंद की वो कहानियाँ जो उनके कथा संकलन ‘मान सरोवर’ से ली गई हैं। प्रेमचंद की कहानियाँ अपने समय की हस्ताक्षर हैं जिनमें आप तब के परिवेश और समाज को भी बखूबी समझ सकते हैं। यूं तो मुंशी जी ने अपनी कहानियाँ हिंदी में ही लिखी हैं फिर भी हमारा ये प्रयास है की उनकी कहानियाँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और इसलिए हमने उन्हें थोड़ी और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इन कहानियों को ख़ास आपके लिए तैयार किया है। तो आइए सुनते हैं प्रेमचंद की विश्व प्रसिद्ध कहानियाँ! 
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    सौभाग्य के कोड़े - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - Saubhagya Ke Kode - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'सौभाग्य के कोड़े' एक गहरी सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत रचना है। यह कहानी उस संघर्ष और दर्द को उजागर करती है, जो अक्सर सौभाग्य की छवि के पीछे छिपा होता है। प्रेमचंद ने अपने अद्वितीय शैली में समाज और रिश्तों की विडंबनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। 
    'सौभाग्य के कोड़े' के माध्यम से प्रेमचंद यह दर्शाते हैं कि जीवन की कठिनाइयाँ और संघर्ष अक्सर हमें मजबूत बनाते हैं और सही राह दिखाते हैं। यह कहानी आपको आत्मचिंतन करने और समाज की गहरी परतों को समझने की प्रेरणा देगी।  
    🔸 कहानी का नाम: सौभाग्य के कोड़े  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, यथार्थवादी  
    🔸 मुख्य विषय: संघर्ष, सौभाग्य, और जीवन की सच्चाइयाँ  
    🔸 मुख्य पात्र: समाज के विभिन्न चरित्र  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    सौभाग्य और संघर्ष का यथार्थ  
    समाज की गहरी विडंबनाएँ  
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    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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    Allahabad Blues

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    नागपूजा - मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानी - Naag Pooja - A Story by Munshi Premchand 
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    🔸 कहानी का नाम: नागपूजा  
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    🔸 मुख्य विषय: परंपरा, आस्था, और मानवीय संवेदनाएं  
    🌟 कहानी की विशेषताएं:  
    ग्रामीण भारत की संस्कृति और परंपराओं का चित्रण  
    आस्था और समाज के बीच का संबंध  
    मुंशी प्रेमचंद की विशिष्ट शैली में संवेदनशीलता और सादगी  
    मुंशी प्रेमचंद की लेखनी के इस अनमोल रत्न का आनंद लें और इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें। 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी और उर्दू साहित्य के एक महान लेखक थे। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन वे प्रेमचंद के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं और संघर्षों को उजागर किया।  
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  • स्याही की यात्रा - cover

    स्याही की यात्रा

    Mayur Nikte

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    हर शब्द में छिपी है एक भावना, 
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    “स्याही की यात्रा” एक ऐसी कविताओं की यात्रा है जहाँ शब्द आत्मा से मिलते हैं और सन्नाटा भी बोल उठता है। यह संग्रह प्रेम, विरह, सपनों और जीवन के उन छोटे-छोटे क्षणों को बयाँ करता है जिन्हें हम महसूस तो करते हैं, पर शब्दों में नहीं ढाल पाते। 
    इन कविताओं में कभी स्याही दर्द बनकर बहती है, तो कभी उम्मीद की किरण बनकर झिलमिलाती है। 
    हर कविता आत्ममंथन का एक नया पड़ाव है — मन से मन की यात्रा। 
    यह किताब उन सभी के लिए है जो शब्दों में जीवन तलाशते हैं और भावनाओं में कविता।
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