Begleiten Sie uns auf eine literarische Weltreise!
Buch zum Bücherregal hinzufügen
Grey
Einen neuen Kommentar schreiben Default profile 50px
Grey
Jetzt das ganze Buch im Abo oder die ersten Seiten gratis lesen!
All characters reduced
कई Moडर्न कुछ हिंग्लिSh… दोहे - cover

कई Moडर्न कुछ हिंग्लिSh… दोहे

Surjeet Kumar

Verlag: Surjeet Kumar

  • 0
  • 0
  • 0

Beschreibung

भाषा सहयोग के युग में, मैं कई दोहे में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करने का प्रयास कर रहा हूँ। जो बाँकी दोहो से इस पुस्तक में निहित दोहों को अलग बनाती है। इस पुस्तक में हास्य , सत्य, कटाक्ष, कटुता के साथ- साथ आधुनिक युग में बदलती हुई परिभाषायों को चिन्हित किया गया है जो आपको अंत तक बांधे रखेगा।
मुझे वर्ष 2008 की लोहड़ी के समारोह का वह क्षण याद है, जब मैंने पहली बार कहानी के रूप में दोहे का पाठ किया था। समारोह के मुख्य अतिथि पंडित जी, हमारे प्रधानाध्यापक महोदय, शिक्षकगण, मेरे मित्र और विद्यार्थियों ने खूब आनंद उठाया और इसकी खूब सराहना की थी। उस समय तक मैंने कभी सोचा भी नही था कि एक दिन मेरा शौख किसी किताब का रूप ले लेगा।
Verfügbar seit: 02.06.2022.
Drucklänge: 21 Seiten.

Weitere Bücher, die Sie mögen werden

  • Griha Daah - Munshi Premchand Ki Kahani - गृह दाह - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - cover

    Griha Daah - Munshi Premchand Ki...

    Munshi Premchand

    • 0
    • 0
    • 0
    गृह दाह - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - Griha Daah - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'गृह दाह' एक संवेदनशील और गहन कथा है जो पारिवारिक जीवन के तनाव, रिश्तों के संघर्ष, और मानवीय भावनाओं के उतार-चढ़ाव को प्रस्तुत करती है। यह कहानी एक परिवार के भीतर के संघर्षों और उनके प्रभावों को बेहद मार्मिक ढंग से सामने लाती है।  
    इस मार्मिक कहानी को सुनें और जानें कि कैसे 'गृह दाह' हमें पारिवारिक जीवन के महत्व और रिश्तों की गहराई को समझने का अवसर देती है। यह कहानी आपके दिल को छू जाएगी। 
    🔸 कहानी का नाम: गृह दाह  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, पारिवारिक  
    🔸 मुख्य विषय: पारिवारिक कलह, रिश्तों का महत्व  
    🔸 मुख्य पात्र: गृहस्थ जीवन में संघर्षरत परिवार  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    पारिवारिक जीवन के तनाव और उसके परिणाम  
    रिश्तों की नाजुकता और उनकी अहमियत 
    प्रेमचंद की मानवीय संवेदनाओं से भरी लेखनी  
    समाज और परिवार के बीच का संतुलन  
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
    Zum Buch
  • Dil Ki Rani - Munshi Premchand Ki Kahani - दिल की रानी - मुंशी प्रेमचंद की कहानी - cover

    Dil Ki Rani - Munshi Premchand...

    Munshi Premchand

    • 0
    • 0
    • 0
    दिल की रानी - मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Dil Ki Rani - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दिल की रानी' मानवीय संबंधों, नारी सम्मान और आत्मसम्मान की एक दिल छू लेने वाली कहानी है। यह कहानी समाज की रूढ़ियों और नारी के संघर्षों को उजागर करती है, जहां 'दिल की रानी' अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए खड़ी होती है। प्रेमचंद की लेखनी की यह उत्कृष्ट कृति हर पाठक को गहराई से सोचने पर मजबूर कर देती है। 
    🔸 कहानी का नाम: दिल की रानी 
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, भावनात्मक  
    🔸 मुख्य विषय: नारी सम्मान, प्रेम, समाज  
    🔸 मुख्य पात्र: दिल की रानी और उसका संघर्ष  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    नारी का आत्मसम्मान और उसकी स्वतंत्रता  
    समाज की रूढ़ियों का प्रभाव  
    प्रेमचंद की यथार्थवादी लेखनी  
    मानवीय संबंधों की गहराई  
    इस प्रेरणादायक और संवेदनशील कहानी को सुनें और जानें कि कैसे 'दिल की रानी' नारी गरिमा और आत्मसम्मान के लिए अपने संघर्ष में एक मिसाल कायम करती है। 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
    Zum Buch
  • Lal Bahadur Shastri - cover

    Lal Bahadur Shastri

    Swati Gautam

    • 0
    • 0
    • 0
    सफलता के अमर सूत्र, उन सूत्रों का संकलन है जो विफलता से उभरे लोगों ने इज़ात किए हैं! इन सूत्रों में आप पाएँगे कि हार के बाद उठ कर दोबारा कोशिश करने के लिए सिर्फ़ हौसला ही नहीं बल्कि होशियारी की भी ज़रूरत होती है! मगर फिर ये सवाल उठता है कि इस होशियारी की परिभाषा कौन तय करता है? क्या होशियारी हर किसी के जीवन में एक समान हो सकती है? नहीं ना! क्योंकि हम सब अलग-अलग ग़लतियाँ करते हैं! इस सीरीज़ को ज़रूर सुनें और समझें कि सफल लोगों ने किन-किन विफलताओं का सामना किया और मुश्किल हालातों को कैसे मात दी!
    Zum Buch
  • मेगन की स्कूल से पिकनिक - एक स्पिरिट गाइड एक घोस्ट टाइगर और एक डरावनी माँ! - cover

    मेगन की स्कूल से पिकनिक - एक...

    Owen Jones

    • 0
    • 0
    • 0
    ओवेन जोन्स द्वारा मेगन की स्कूल से पिकनिक 
    एक मार्गदर्शक आत्मा, एक बाघ का भूत और एक डरावनी माँ! 
    मेगन स्कूल से प्रागैतिहासिक गुफाओं की पिकनिक पर जाती है और गुफाओं के जीवन को महसूस करती है। मेगन एक 13 वर्षीय किशोर लड़की है जिसे यह एहसास होता है कि उसके पास मानसिक शक्तियां हैं जो दूसरों के पास नहीं हैं। सबसे पहले उसने इसके बारे मे अपनी माँ से बात करने की कोशिश की, लेकिन विनाशकारी परिणामों के कारण उसने चुप रहना सीख लिया। 
    हालांकि, कुछ लोगों ने मदद करने की पेशकश की और एक जानवर ने एक विशेष दोस्ती दिखाई, लेकिन वे सामान्य अर्थों मे `जीवित` नहीं थे। वे जिन्दा नही थे। 
    मेगन के ऐसे तीन दोस्त हैं: वाकिंहिन्शा की मार्गदर्शक आत्मा जो पृथ्वी पर अपने अंतिम जीवन मे सिओक्स था; उसके नाना जी ग्रैम्पस और एक विशाल साइबेरियन बाघ ग्र्र। 
    वाकिंहिंशा को आध्यात्मिक, मानसिक और अपसामान्य सभी चीजों की अत्यंत जानकारी थी; उसके दादा जी एक नौसिखिया `मृत व्यक्ति` हैं और ग्र्र केवल बाघ बोल सकता था, जैसा कि कोई कल्पना कर सकता है और इनमे से अधिकांश निश्चित रूप से मनुष्यों के लिए अस्पष्ट थे। 
    मेगन के जीवन के इस भाग मे, उसे और उसके स्कूल के बाकी विद्यार्थियों को स्कूल से पिकनिक पर ले जाया जाता है। ये वार्षिक कार्यक्रम होना चाहिए लेकिन स्कूल के पास हमेशा खर्चा उठाने के लिए पैसे नहीं होते थे। 
    मेगन के लिए यह असाधारण था क्योंकि उसने अतीत के एक युग मे रहने वाले लोगों के जीवन की एक झलक देखी। 
    मेगन का अनुसरण करें कि वह कैसे अपने अतीत मे स्कूल की पिकनिक से और अधिक सीखने की कोशिश करती है और वह अपने मार्गदर्शन करने वाली आत्मा जो उसे सबसे अच्छा करने की सलाह देता है को पढ़ती है ।
    Zum Buch
  • दो बैलों की कथा - मुंशी प्रेमचंद - Do Bailon Ki Katha - Munshi Premchand - cover

    दो बैलों की कथा - मुंशी प्रेमचंद...

    मुंशी प्रेमचंद

    • 0
    • 0
    • 0
    दो बैलों की कथा - मुंशी प्रेमचंद | Do Bailon Ki Katha - Munshi Premchand 
    कथाकार मुंशी प्रेमचंद देश ही नहीं, दुनिया भर में विख्यात है। प्रेमचंद ने यूं तो कई कहानियां लिखी है लेकिन उनकी लिखी कहानी ‘दो बैलों की कथा’ सबसे भोले माने जाते जानवर दो बैलों की कहानी है। दरअसल, यह कहानी हीरा और मोती नाम के दो ऐसे बैलों की है, जो स्वाभिमानी, बहादुर और परोपकारी है और अपनी आज़ादी के लिए कुछ भी कर सकते हैं। तो चलिए, आप भी हमारे इस एपिसोड में सुनिए मुंशी प्रेमचंद की यह कहानी….कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद 
    कलम के जादूगर प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी बड़े ही ध्यान और सम्मान के साथ सुनी जाती हैं। आज हम लेकर आए हैं प्रेमचंद की वो कहानियाँ जो उनके कथा संकलन ‘मान सरोवर’ से ली गई हैं। प्रेमचंद की कहानियाँ अपने समय की हस्ताक्षर हैं जिनमें आप तब के परिवेश और समाज को भी बखूबी समझ सकते हैं। यूं तो मुंशी जी ने अपनी कहानियाँ हिंदी में ही लिखी हैं फिर भी हमारा ये प्रयास है की उनकी कहानियाँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और इसलिए हमने उन्हें थोड़ी और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इन कहानियों को ख़ास आपके लिए तैयार किया है। तो आइए सुनते हैं प्रेमचंद की विश्व प्रसिद्ध कहानियाँ! 
    Zum Buch
  • भारतीय डरावनी रातें - डर सिर्फ अंधेरे में नहीं होता… वह वहीं रहता है जहाँ इंसान सच बोलने से डरता है।” - cover

    भारतीय डरावनी रातें - डर सिर्फ...

    amulya mishra

    • 0
    • 0
    • 0
    इंडियन हॉरर नाइट्स – अमूल्या मिश्रा द्वारा 
     19 कहानियाँ। एक रात। और डर जो कभी खत्म नहीं होता। 
    रात बीती, मगर नींद नहीं आई। 
     बरगद के नीचे कुछ था — जो सुनता भी था, और बोलता भी। 
     और अगली अमावस्या से पहले, वह सिर्फ नाम पुकारता नहीं था… 
     वह नाम लेता था। 
    भारत की भूमि पर जितनी कहानियाँ जीवित हैं, उतने ही भूत भी। 
     इंडियन हॉरर नाइट्स — 19 डरावनी कहानियों का संग्रह, जो आपको लोककथा, विश्वास और पाप की सीमा तक ले जाएगी। 
    यह सिर्फ डर की किताब नहीं — यह भारत के अंधेरे हिस्सों का नक्शा है। 
     हर अध्याय एक नए राज्य, एक नए श्राप, और एक नई आत्मा की कहानी कहता है। 
    🩸 शामिल कहानियाँ:बरगद की फुसफुसाहट (केरल)मलचा महल का मध्यरात्रि रहस्य (दिल्ली)कुएँ की दुल्हन (राजस्थान)बनारस घाटों की आवाज़ें (उत्तर प्रदेश)हाईवे की चुड़ैल (झारखंड)हवेली का आईना (लखनऊ)अघोरी का श्राप (वाराणसी)ऊटी का कमरा 207 (तमिलनाडु)नागिन का प्रतिशोध (छत्तीसगढ़)शनिवारवाड़ा की चुप्पी (पुणे) (और कई और…) 
    🕯️ लेखक: अमूल्या मिश्रा 
     📖 उपलब्धता: Amazon.com और Kindle पर
    Zum Buch