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तक बचे हुए लोग - cover

तक बचे हुए लोग

फिलिप जी हेनले

Maison d'édition: Babelcube

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Synopsis

यूरोप की सरकारों के पास संकट पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं थी क्योंकि किसी को भी इसका कारण नहीं पता था या यह कैसे फैला था।  1348 में, प्लेग इतनी तेजी से फैला कि इससे पहले कि किसी भी चिकित्सक या सरकारी अधिकारियों को इसकी उत्पत्ति पर विचार करने का समय मिलता, लगभग एक तिहाई यूरोपीय आबादी पहले ही नष्ट हो चुकी थी।  भीड़-भाड़ वाले शहरों में, पचास प्रतिशत से अधिक आबादी का मरना असामान्य नहीं था।  पृथक क्षेत्रों में रहने वाले यूरोपीय लोगों को कम नुकसान उठाना पड़ा, और मठों और पुजारियों को विशेष रूप से अधिक नुकसान हुआ क्योंकि वे ब्लैक डेथ के पीड़ितों की देखभाल करते थे। 
Disponible depuis: 12/01/2024.
Longueur d'impression: 255 pages.

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    विवरण: 
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    Lauli Road - Malgudi Days by R. K. Narayan – लॉली रोड - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण  
    “Lauli Road” is a humorous and satirical Hindi audiobook from R. K. Narayan’s Malgudi Days, featuring a talkative freelance journalist who ends up with a British statue stuck in his doorway. Set in post-independence India, the story explores themes of patriotism, absurdity, and unintended consequences through sharp wit and brilliant storytelling. 
    "एक बातूनी आदमी अपने दोस्तों को बताता है कि केवल एक फ्रीलांस पत्रकार होते हुए भी उसने मालगुडी में न्यू एक्सटेंशन में एक घर में कैसे लिया था। यह कहानी भारत को स्वतंत्रता मिलने के ठीक बाद की है। एक कंबल बेचने वाला, जो आज़ादी से पहले अंग्रेजों को कंबल बेचा करता था, वह आज चुनाव जीतकर नगर पालिका का अध्यक्ष बन गया है। चुनाव जीतने के बाद, वह अध्यक्ष ऐसी चीज़ें करना चाहता है जिससे उसका पश्चाताप पूरा हो। उसकी यह इच्छा बहुत सी रोकांचक घटनाओं को जन्म देती है। साथ ही, वह 'सर फ्रेडरिक' नामक एक ब्रिटिश अधिकारी की प्रतिमा मालगुड़ी से हटाने के लिए भी कुछ करना चाहता है। धीरे-धीरे, जब, प्रतिमा को गिराने के सारे उपाय असफल होने लगते हैं, वह बातूनी आदमी सुझाव देता है कि अगर मुफ्त में दे दी जाए, तो वह उस प्रतीमा को अपने साथ ले जाएगा।" 
    लेखक आर. के. नारायण 
    “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
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    कवच - मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Kavach - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'कवच' एक प्रेरक और मार्मिक रचना है, जो आत्म-सुरक्षा, आत्मबल और सच्चाई के महत्व को उजागर करती है। इस कहानी में जीवन के संघर्षों और कठिनाइयों से बचने के लिए आत्मविश्वास और निडरता को कवच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 'कवच' के माध्यम से प्रेमचंद ने यह संदेश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में सत्य और आत्मबल ही हमारा असली कवच होता है। यह कहानी आपकी सोच को प्रेरित करेगी और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करेगी।  
    🔸 कहानी का नाम: कवच  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: प्रेरणादायक, यथार्थवादी  
    🔸 मुख्य विषय: आत्मबल, सत्य, और संघर्ष  
    🔸 मुख्य पात्र: जीवन के संघर्ष में डटे व्यक्ति  
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    आत्मबल और सत्य की शक्ति  
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    मुंशी प्रेमचंद की गहन और प्रेरणादायक लेखनी  
    सच्चाई और निडरता का महत्व 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
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