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भूमिगत स्वर्ग में एक रात - विली जोन्स एनडीई की कहानी‎ - cover

भूमिगत स्वर्ग में एक रात - विली जोन्स एनडीई की कहानी‎

Owen Jones

Traducteur Anamika

Maison d'édition: Tektime

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Synopsis

विलियम जोन्स, ब्रेकन बीकन का एक भेड़ पालक किसान है, जिसका जीवन तब तक खुशहाल ‎होता है, जब तक कि उसकी पत्नी सारा की युवावस्था में ही मृत्यु नहीं हो जाती। यह उसे तबाह ‎कर देती है और स्पष्ट रूप से वह आत्म-विनाश की ओर झुक जाता है। उसकी बेटी बेकी मदद ‎करने की कोशिश करती है, लेकिन उसके पिता को लेकर उसका धैर्य भी जवाब देने लगता है। ‎एक शाम, उसे लगता है कि वह पक्का मर गया है और अपने दुख से छुटकारा पा गया है, ‎लेकिन ऐसा नहीं होना था। वह ठीक हो गया। हालाँकि उसका जीवन फिर कभी पहले जैसा नहीं ‎हुआ। उसने भूमिगत स्वर्ग की खोज की, जहां उसकी पत्नी रहती थी, और उसे नई मिली जीवनी ‎शक्ति ने उसका और उन सभी लोगों का जीवन बदल दिया जिनके वह संपर्क में आया था। ‎
Disponible depuis: 28/04/2022.
Longueur d'impression: 322 pages.

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    Gatekeeper Ka Inam - Malgudi Days by R. K. Narayan - गेटकीपर का इनाम - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण 
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    “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
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    “ मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
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