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ट्रैंक्विलिटी - उम्मीदों का गाँव - cover

ट्रैंक्विलिटी - उम्मीदों का गाँव

Ken Luball

Traducteur Kanak Preet Kaur

Maison d'édition: Tektime

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Synopsis

ट्रैंक्विलिटी: अ विलेज ऑफ़ होप ‘द अवेकनिंग टेट्रालजी’ की तीसरी बुक है| ट्रैंक्विलिटी कैनेडियन रॉकी माउंटेन्स की गहराइयों में स्थित है जहां एक छोटी लड़की जिसका नाम मोनिक है पैदा हुई थी और उसको पाल पोस कर ट्रैंक्विलिटी और उनके पड़ोसी फर्स्ट नेशन गाओ के लोगों ने बड़ा किया था | क्योंकि यह पूरी जिंदगी इन अच्छे लोगों से घिरी रही, इसीलिए मोनिक के पास शेयर करने के लिए अनगिनत लेसंस है जो उसने अपनी जिंदगी की अविश्वसनीय जर्नी पर सीखें, और वह हमारे साथ इन्हें शेयर करती है |
ट्रैंक्विलिटी: अ विलेज ऑफ़ होप ‘द अवेकनिंग टेट्रालजी’ की तीसरी बुक है| ट्रैंक्विलिटी एक सुखद जीवन से भरा हुआ गांव है जो कि कैनेडियन रॉकी माउंटेंस में स्थित है |  इसके बीच में से एक  छोटी सी नदी बहती है जिसकी चारों तरफ विशाल रॉकी माउंटेंस है,  जो कि पूरा साल बर्फ से ढके रहते हैं |  यह गांव पूरी दुनिया से अलग बना हुआ है;  इनका सिर्फ एक ही पड़ोसी है,  वह है फर्स्ट नेशन  का नेटिव ट्राइब |  यह कहानी मोनिक  नाम की एक लड़की के द्वारा  बताई गई है, जिसको पाल पोस कर ट्रैंक्विलिटी और उनके पड़ोसी फर्स्ट नेशन गाओ के लोगों ने बड़ा किया था | क्योंकि यह पूरी जिंदगी इन अच्छे लोगों से घिरी रही, इसीलिए मोनिक के पास ज़िन्दगी और प्यार पर शेयर करने के लिए अनगिनत लेसंस है जो उसने अपनी जिंदगी की अविश्वसनीय जर्नी पर सीखें, और वह हमारे साथ इन्हें शेयर करती है, और इससे हमें पता चलता है कि अगर एक बच्चे को प्यार के डर की जगह नफरत के डर और उम्मीद के साथ बड़ा किया जाए, तो क्या होता है |
Disponible depuis: 24/10/2022.
Longueur d'impression: 189 pages.

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    मैं कभी दस सिर वाला नहीं था। मैं दस दिमाग वाला था... और किसी में भी शांति नहीं थी। 
    वे कहते हैं कि मैं अंधकार से पैदा हुआ हूँ—राक्षसों से, छल से, क्रोध से। 
    लेकिन मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ: तुम्हें किसने सिखाया कि प्रकाश पवित्र है और अंधकार अशुद्ध? 
    मैं बुरा पैदा नहीं हुआ था। मैं असाधारण पैदा हुआ था । 
    दुनिया मुझे कई नामों से जानती है: लंकेश, दशमुख, राक्षस, दानव। 
    लेकिन इनमें से कुछ भी बनने से पहले, मैं एक साधक था। 
    उन्होंने कहा कि मैं घमंडी हूँ। शायद मैं था भी। लेकिन बताइए—क्या कोई शेर अपनी दहाड़ के लिए कभी माफ़ी मांग सकता है? 
    लोग युद्ध को याद करते हैं। वे अपहरण, लंका दहन, अंतिम बाण को याद करते हैं। 
    लेकिन वे उससे पहले के वर्षों को भूल जाते हैं। वे वर्ष जब मैंने बुद्धिमानी से शासन किया। वे वर्ष जब मैंने गरीबों को भोजन कराया, ऋषियों की रक्षा की, संगीतकारों का सम्मान किया, विद्वानों का आतिथ्य किया। मेरी लंका सिर्फ़ पत्थर में स्वर्णिम नहीं थी। वह विचारों में, संस्कृति में, तेज में दमकती थी। 
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