मार्ग के अंधेरे
Johnn A. Escobar
Verlag: Babelcube
Beschreibung
200,000 साल पहले, पहले इंसानों ने अपनी बुद्धि दिखाई। और जब यह हो रहा था, मृत्यु और उजाड़ के रास्ते पर, एक आदमी ने अपने भाग्य को अंधेरे के रसातल के बीच खोजा।
Verlag: Babelcube
200,000 साल पहले, पहले इंसानों ने अपनी बुद्धि दिखाई। और जब यह हो रहा था, मृत्यु और उजाड़ के रास्ते पर, एक आदमी ने अपने भाग्य को अंधेरे के रसातल के बीच खोजा।
मोहित और मेघा बड़े मन से पालीघाट में वर्षों से वीरान पड़े और खंडहर हो चुके मेंटल हॉस्पिटल को तोड़कर एक सुंदर गेस्ट हाउस बनाते हैं. वो इस बात से अनजान हैं कि इस गेस्ट हाउस पर गुजरे कल की काली परछाई हैं. दोनों बड़े जोर-शोर से वहाँ आने वाले गेस्ट का स्वागत करते हैं. लेकिन वो गेस्ट कुछ अलग हैं. उनके आने के बाद गेस्ट हाउस में हर दिन कुछ नया घटता है. आखिर कौन हैं वो गेस्ट और क्या चाहते हैं? क्या मोहित और मेघा उन रहस्यमयी घटनाओं का सच कभी जान पायेंगे? क्या होगा पालीघाट गेस्ट हाउस का और वहाँ ठहरने वाले मेहमानों का?Zum Buch
Amavasya Ki Raatri - Munshi Premchand | अमावस्या की रात्रि - मुंशी प्रेमचंद बीमार पत्नी के इलाज पर खर्च करने के लिये धन के नाम पर अगर कुछ था तो सिर्फ़ हुंडियों का पुलिंदा, वैद्य ने भी बिना पैसे के इलाज करने से मना कर दिया।कलम के जादूगर मुंशी प्रेमचंद कलम के जादूगर प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी बड़े ही ध्यान और सम्मान के साथ सुनी जाती हैं। आज हम लेकर आए हैं प्रेमचंद की वो कहानियाँ जो उनके कथा संकलन ‘मान सरोवर’ से ली गई हैं। प्रेमचंद की कहानियाँ अपने समय की हस्ताक्षर हैं जिनमें आप तब के परिवेश और समाज को भी बखूबी समझ सकते हैं। यूं तो मुंशी जी ने अपनी कहानियाँ हिंदी में ही लिखी हैं फिर भी हमारा ये प्रयास है की उनकी कहानियाँ ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और इसलिए हमने उन्हें थोड़ी और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इन कहानियों को ख़ास आपके लिए तैयार किया है। तो आइए सुनते हैं प्रेमचंद की विश्व प्रसिद्ध कहानियाँ!Zum Buch
मेरे पास नहीं है कोई सुरक्षा कवच। मैं फिर भी प्रेतों को आमन्त्रित करती हूँ। आओ, मुझे और भी तुम्हारी कथाएँ कहनी हैं...अब तुम दे जाओ कथाएँ। कह जाओ अपने दमन की कथाएँ, शोषण की दास्तानें और अतृप्त इच्छाओं की अर्जियाँ दे जाओ। उन्हें कथा में पूरी करूँगी। आख़िर कहानी में एक मनवांछित संसार रचने का साहस तो है न मेरे पास। मेरा बचपन गाँव में अधिक गुज़रा है, सो मेरे पास वहीं की कहानियाँ बहुत हैं। शहरों में ज़िन्दा भूत मिले थे। उनकी कथाएँ तो लिखती ही रहती हूँ। पहली बार ऐसे भूतों की कहानियाँ लिखी हैं... अब आपके हवाले हैं भूत कथाएँ... शुक्रिया उन भूतों का जिन्होंने पीछे पड़कर लिखवा लिया। उन्हें भुतहा सलाम। किताब पढ़ते पीछे मुड़कर मत देखना... भूत भाग जायेगा।Zum Buch
इंडियन हॉरर नाइट्स – अमूल्या मिश्रा द्वारा 19 कहानियाँ। एक रात। और डर जो कभी खत्म नहीं होता। रात बीती, मगर नींद नहीं आई। बरगद के नीचे कुछ था — जो सुनता भी था, और बोलता भी। और अगली अमावस्या से पहले, वह सिर्फ नाम पुकारता नहीं था… वह नाम लेता था। भारत की भूमि पर जितनी कहानियाँ जीवित हैं, उतने ही भूत भी। इंडियन हॉरर नाइट्स — 19 डरावनी कहानियों का संग्रह, जो आपको लोककथा, विश्वास और पाप की सीमा तक ले जाएगी। यह सिर्फ डर की किताब नहीं — यह भारत के अंधेरे हिस्सों का नक्शा है। हर अध्याय एक नए राज्य, एक नए श्राप, और एक नई आत्मा की कहानी कहता है। 🩸 शामिल कहानियाँ:बरगद की फुसफुसाहट (केरल)मलचा महल का मध्यरात्रि रहस्य (दिल्ली)कुएँ की दुल्हन (राजस्थान)बनारस घाटों की आवाज़ें (उत्तर प्रदेश)हाईवे की चुड़ैल (झारखंड)हवेली का आईना (लखनऊ)अघोरी का श्राप (वाराणसी)ऊटी का कमरा 207 (तमिलनाडु)नागिन का प्रतिशोध (छत्तीसगढ़)शनिवारवाड़ा की चुप्पी (पुणे) (और कई और…) 🕯️ लेखक: अमूल्या मिश्रा 📖 उपलब्धता: Amazon.com और Kindle परZum Buch
नए दौर की ऐसी थ्रिलिंग कहानी जो रोंगटे खड़े कर देती है. ये कहानी है उस खौफनाक सच की जिससे रजत महल यानी ऐलेनौर कॉटिज में रहने वाले सभी लोग अंजान थे सिवाए रणवीर चौधरी के. रणवीर इस सच से इसलिए भी वाक़िफ़ था क्योंकि वो उसकी ज़िंदगी का सच था. एक ऐसा सच जिसे मिटा कर वो बचाना चाहता था अपने पुरखों की अमानत, आलीशान पैलेस 'रजत महल' ! मगर अपने पुरखों की अमानत को बचाने की कोशिश में उठाए उसने कुछ ऐसे ग़लत क़दम, जिसका ख़ामियाज़ा कई लोगों को भुगतना पड़ा. और उन्हीं लोगों में ही था एक शख़्स 'क्रिस'! जिसने ठान ली थी कि वो ये खौफनाक सच सब के सामने ला कर रहेगा. एक तरफ़ आम शक्तियों वाला क्रिस अपनी ज़िंदगी हर पल दाँव पर लगाने को राज़ी है वहीं कुछ शक्तियों के सहारे रणवीर चौधरी उसके इरादों को नाक़ामयाब करने की कोशिश कर रहा है. कौन हो पाएगा कामयाब इस लड़ाई में, क्रिस या रणबीर? या फिर वो अदृश्य शक्ति जिसके बने जाल में फँस चुके हैं सब?Zum Buch
कोई खटखटा रहा था उसके ज़हन के दरवाज़े पे… आवाज़ें जो सिर्फ़ वो सुन पा रहा था, सपने जो सिर्फ़ वो देख पा रहा था, सरसराहट जो सिर्फ़ वो महसूस कर पा रहा था… उस अतीत में जहाँ बरसों से उसका इंतज़ार था. रजत अपनी नयी नवेली दुल्हन के साथ अपने नए घर मे प्रवेश करता है, और वहाँ से शुरू होता है एक ऐसे भय का क्रम जिससे निकल पाना असम्भव सा लगने लगता है. He could hear the knocking, but no one was behind the door. He could hear voices, see nightmares, feel a presence behind him... in the dark ruins of the past it had been waiting for him. Rajat enters his new house with his new bride, only to find himself get trapped in an unending string of moments of dread.Zum Buch