रक्तपथ: जंगल का क़ानून
Gaurav Garg
Narrateur 07
Maison d'édition: Independently Published
Synopsis
This audiobook is narrated by an AI Voice. 1990 का दशक। बिहार की रक्तरंजित भूमि पर, जहाँ जाति, राजनीति और अपराध का अपवित्र गठबंधन ही परम सत्य है, आमड़ी नामक एक छोटा सा गाँव शांति से साँस लेता है। किंतु एक रात, यह शांति एक भयावह चीख़ में बदल जाती है। शक्तिशाली बाहुबली और विधायक बनने का आकांक्षी, गजेंद्र "गज्जू" सिंह, एक गहरे राजनीतिक षड्यंत्र को छिपाने के लिए पूरे गाँव को जीवित जला देता है। उस नरसंहार की राख से केवल एक शरीर जीवित बचता है—दस वर्षीय अर्जुन प्रसाद, जिसकी आँखों ने उस रात अपने पिता की हत्या और अपने संसार का विनाश देखा था। एक दशक पश्चात, अर्जुन लौटता है। वह अब एक मासूम बालक नहीं, बल्कि गिद्धपुरी की गलियों में पला-बढ़ा एक कठोर, कुशल और प्रतिशोध से भरा युवक है। उसका जीवन का एकमात्र उद्देश्य है गजेंद्र सिंह का सर्वनाश। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, वह अपराध की दुनिया की सीढ़ियाँ चढ़ता है, गज्जू के प्रतिद्वंद्वी गिरोह में शामिल होता है, और स्वयं एक भयावह 'भूत' के रूप में अपनी पहचान बनाता है जो सालीमपुर के सत्ता के समीकरणों को हिला देता है। किंतु जैसे-जैसे वह अपने लक्ष्य के निकट पहुँचता है, उसे एक और भी गहरे और अंधकारपूर्ण सत्य का आभास होता है। उसे पता चलता है कि गज्जू सिंह तो इस विशाल षड्यंत्र का केवल एक चेहरा है, और असली तार तो पटना में बैठे एक शक्तिशाली मंत्री, भार्गव दत्त, के हाथों में हैं। इसी दौरान, उसकी राह एक आदर्शवादी, किंतु विवश आरक्षी अधीक्षक इमरान आलम और एक साहसी पत्रकार अमृता सिन्हा से टकराती है, जो दोनों अपने-अपने तरीक़े से इसी अपवित्र गठजोड़ को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं। विश्वासघात और धोखे के मध्य, इन तीन टूटे हुए लोगों का एक हताश गठबंधन बनता है। अब अर्जुन को न केवल एक बाहुबली और एक मंत्री से, बल्कि उस पूरी भ्रष्ट प्रणाली से लड़ना है जिसने उसे बनाया है। "रक्तपथ" केवल एक प्रतिशोध की कहानी नहीं है; यह उस भयावह प्रश्न का उत्तर खोजती है कि जब न्याय स्वयं एक अपराधी बन जाए, तो एक व्यक्ति को किस सीमा तक जाना पड़ता है।
Durée: environ 7 heures (06:40:08) Date de publication: 08/06/2025; Unabridged; Copyright Year: — Copyright Statment: —

