लघु कथाएँ
दानिएल कनाल्स फ्लोरेस
Verlag: Babelcube
Beschreibung
‘लघु कथाएँ’ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकशित छोटी-छोटी कहानियों का एक संकलन है। इसमें हॉरर, सस्पेंस, साइंस फिक्शन एवं एक्शन वाली कई कहानियों के अलावा कई पुरस्कृत टेक्स्ट भी शामिल हैं।
Verlag: Babelcube
‘लघु कथाएँ’ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकशित छोटी-छोटी कहानियों का एक संकलन है। इसमें हॉरर, सस्पेंस, साइंस फिक्शन एवं एक्शन वाली कई कहानियों के अलावा कई पुरस्कृत टेक्स्ट भी शामिल हैं।
Lauli Road - Malgudi Days by R. K. Narayan – लॉली रोड - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण “Lauli Road” is a humorous and satirical Hindi audiobook from R. K. Narayan’s Malgudi Days, featuring a talkative freelance journalist who ends up with a British statue stuck in his doorway. Set in post-independence India, the story explores themes of patriotism, absurdity, and unintended consequences through sharp wit and brilliant storytelling. "एक बातूनी आदमी अपने दोस्तों को बताता है कि केवल एक फ्रीलांस पत्रकार होते हुए भी उसने मालगुडी में न्यू एक्सटेंशन में एक घर में कैसे लिया था। यह कहानी भारत को स्वतंत्रता मिलने के ठीक बाद की है। एक कंबल बेचने वाला, जो आज़ादी से पहले अंग्रेजों को कंबल बेचा करता था, वह आज चुनाव जीतकर नगर पालिका का अध्यक्ष बन गया है। चुनाव जीतने के बाद, वह अध्यक्ष ऐसी चीज़ें करना चाहता है जिससे उसका पश्चाताप पूरा हो। उसकी यह इच्छा बहुत सी रोकांचक घटनाओं को जन्म देती है। साथ ही, वह 'सर फ्रेडरिक' नामक एक ब्रिटिश अधिकारी की प्रतिमा मालगुड़ी से हटाने के लिए भी कुछ करना चाहता है। धीरे-धीरे, जब, प्रतिमा को गिराने के सारे उपाय असफल होने लगते हैं, वह बातूनी आदमी सुझाव देता है कि अगर मुफ्त में दे दी जाए, तो वह उस प्रतीमा को अपने साथ ले जाएगा।" लेखक आर. के. नारायण “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।Zum Buch
Hare Coat Ke Piche - Malgudi Days by R. K. Narayan - हरे कोट के पीछे - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण "राजू एक पाकिट मार है, लेकिन वह हमेशा से अपनी पत्नी को झूठ बोलता आ रहा है कि वह बिज़नेस कर पैसे कमाता है। एक दिन वह ग्रीन ब्लेज़र वाले एक आदमी का पीछा करता है जो अपनी बेटी के लिए गुब्बारे लेकर जा रहा होता है। मौक़ा मिलते ही राजू उसका पाकिट मार लेता है। पर्स से पैसे निकालते समय राजू की नज़र उन गुब्बारों पर पड़ती है जो वह आदमी उसकी बेटी के लिए ले जा रहा था। उसे सोचकर बुरा लगता है कि जब वह घर लौटेगा और उसकी बेटी को गुब्बारे नहीं दिखेंगे तो उसे कितना दुःख होगा। राजू उन गुब्बारों को दोबारा पर्स में रख उसके ब्लेज़र के पाकिट में डालने जा ही रहा होता है कि पुलिस आकर उसे पकड़ लेती है। पुलिस राजू को बहुत मारती है। तब वह निश्चय करता है कि आगे से वह किसी के भी प्रति सहानुभति नहीं दिखाएगा। "लेखक आर. के. नारायण “ मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।Zum Buch
दण्ड - मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Dand - Munshi Premchand Ki Kahani मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दण्ड' अन्याय, समाज की कठोर सच्चाई और इंसानी संवेदनाओं का मार्मिक चित्रण है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे समाज में दोष और सजा के बीच एक गहरी खाई मौजूद है, और इंसान अपने कर्मों के दण्ड को कैसे झेलता है। प्रेमचंद की यह कृति न्याय, सामाजिक व्यवस्था और मानवीय कमजोरियों पर प्रकाश डालती है। 'दण्ड' न केवल समाज की विद्रूपताओं को सामने लाती है, बल्कि न्याय के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करती है। 🔸 कहानी का नाम: दण्ड 🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद 🔸 शैली: सामाजिक, भावनात्मक 🔸 मुख्य विषय: अन्याय, दण्ड, और सामाजिक न्याय 🔸 मुख्य पात्र: पीड़ित और समाज के विभिन्न वर्ग 🌟 कहानी के मुख्य बिंदु: न्याय और अन्याय का संघर्ष सामाजिक व्यवस्था और उसकी कठोरता प्रेमचंद की गहरी सामाजिक दृष्टि मानवीय संवेदनाओं का चित्रण मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।Zum Buch
इंडियन हॉरर नाइट्स – अमूल्या मिश्रा द्वारा 19 कहानियाँ। एक रात। और डर जो कभी खत्म नहीं होता। रात बीती, मगर नींद नहीं आई। बरगद के नीचे कुछ था — जो सुनता भी था, और बोलता भी। और अगली अमावस्या से पहले, वह सिर्फ नाम पुकारता नहीं था… वह नाम लेता था। भारत की भूमि पर जितनी कहानियाँ जीवित हैं, उतने ही भूत भी। इंडियन हॉरर नाइट्स — 19 डरावनी कहानियों का संग्रह, जो आपको लोककथा, विश्वास और पाप की सीमा तक ले जाएगी। यह सिर्फ डर की किताब नहीं — यह भारत के अंधेरे हिस्सों का नक्शा है। हर अध्याय एक नए राज्य, एक नए श्राप, और एक नई आत्मा की कहानी कहता है। 🩸 शामिल कहानियाँ:बरगद की फुसफुसाहट (केरल)मलचा महल का मध्यरात्रि रहस्य (दिल्ली)कुएँ की दुल्हन (राजस्थान)बनारस घाटों की आवाज़ें (उत्तर प्रदेश)हाईवे की चुड़ैल (झारखंड)हवेली का आईना (लखनऊ)अघोरी का श्राप (वाराणसी)ऊटी का कमरा 207 (तमिलनाडु)नागिन का प्रतिशोध (छत्तीसगढ़)शनिवारवाड़ा की चुप्पी (पुणे) (और कई और…) 🕯️ लेखक: अमूल्या मिश्रा 📖 उपलब्धता: Amazon.com और Kindle परZum Buch
🎧 ऑडियोबुक: खुजली-मुजली क्विज़ और स्टोरी प्लैनेट सीरीज़ लेखक: धर्मेंद्र मिश्रा खास बच्चों की खास कहानी! खुजली और मुजली — दो साधारण से बच्चे, जिनमें है एक असाधारण माइंड सुपरपावर! न कोई जादू, न कोई मंत्र — सिर्फ आत्मबल, समझदारी और अंदर छुपी ताकत की प्रेरणादायक कहानी। 📖 यह कहानी क्या सिखाती है? खुजली एक दब्बू, डरा-सहमा बच्चा है और मुजली एक गंदी बस्ती का उपेक्षित लड़का। लेकिन जब दोनों साथ आते हैं, तो साबित करते हैं कि सच्ची शक्ति हमारे भीतर होती है। 🌟 क्या मिलेगा इस ऑडियोबुक में?बच्चों की सोच को बढ़ाने वाली प्रेरणात्मक कहानीमनोरंजन के साथ मज़ेदार क्विज़ और सीखमधुर आवाज़ और संवादात्मक अंदाज़ में पेशआसान हिंदी भाषा, जो हर बच्चे के लिए उपयुक्त 🎯 उम्र: बच्चों,बड़े और बूढ़े के लिए ⏱️ अवधि: हर भाग 5–10 मिनट कहानीकार: धर्मेंद्र मिश्रा — जाने-माने बाल साहित्यकार (मुहाना, दायरा, घोस्ट हंटर, सैर-सपाटा, धारणावाद आदि के लेखक) 📢 अभी सुनें! अपने बच्चों को आत्मविश्वास, हिम्मत और समझ की ओर एक मज़ेदार रास्ता दिखाएं — खुजली-मुजली के साथ!Zum Buch
"ये कहानी है उस राजमहल की... जहाँ राजा भगवान था, और प्रजा... उसकी बंधक। स्वर्णकुश, एक सनकी तानाशाह जिसने राज्य को शोषण, यौन कुंठा और खौफ के नरक में झोंक दिया। रानी त्रिशाला, सौंदर्य की देवी, लेकिन भीतर से जली हुई... और विशालाक्ष, वो युवा जिसकी नज़र विद्रोह था, और शरीर एक तूफ़ान। झरोखे के उस पार क्या छुपा था? बलि... वासना... या कोई क्रांति? धर्मेंद्र मिश्रा और हिमांशु त्रिपाठी द्वारा लिखित: ‘राज महल’ एक दहला देने वाली कथा… राजा, रानी और बगावत की।" ........... This is the story of a royal palace where the king was worshipped like a 'GOD' and the people were his prisoners. Swarnkush: a mad tyrant, Queen Trishala: a goddess of beauty but burning inside, and Vishalaksh: a young rebel with a storm in his heart. A tale of sacrifice, lust and rebellion written by Dharmendra Mishra and Himanshu Tripathi; a dark Hindi thriller that chills to the bone.”Zum Buch