Rejoignez-nous pour un voyage dans le monde des livres!
Ajouter ce livre à l'électronique
Grey
Ecrivez un nouveau commentaire Default profile 50px
Grey
Abonnez-vous pour lire le livre complet ou lisez les premières pages gratuitement!
All characters reduced
ब्लॉसम राइज़ का रहस्य - cover

ब्लॉसम राइज़ का रहस्य

A L Butcher

Maison d'édition: Babelcube

  • 0
  • 0
  • 0

Synopsis

एक नौजवान नर्स एक ऐसे अस्पताल में काम करने जाती है जो पहले सेना का अस्पताल हुआ करता था और उसे वहाँ अपने परिवार से संबंधित एक राज़ का पता चलता है, साथ ही वहाँ के भूत भी उसे जाने-पहचाने लगते हैं. एक भुतहा लघुकथा.
Disponible depuis: 22/04/2022.
Longueur d'impression: 61 pages.

D'autres livres qui pourraient vous intéresser

  • Godaan - Munshi Premchand - गोदान - मुंशी प्रेमचंद - cover

    Godaan - Munshi Premchand -...

    Munshi Premchand

    • 0
    • 0
    • 0
    Godaan - Munshi Premchand - गोदान - मुंशी प्रेमचंद 
    🎧 Listen to "Godan - गोदान", the timeless Hindi novel by legendary writer Munshi Premchand, now available as a powerful audiobook. This literary masterpiece highlights the struggles, poverty, and social realities of Indian farmers, a simple, god-fearing man bound by tradition and societal norms. Godan is widely regarded as Premchand’s greatest work, rich with emotional depth and social commentary. Perfect for lovers of Hindi literature, classic novels, and storytelling that reflects real India. 
    हिंदी के महान लेखक " श्री मुंशी प्रेमचंद जी " द्वारा लिखित " गोदान ", गोदान प्रेमचंद का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है जो भारतीय किसानों की खराब आर्थिक स्थिति पर केंद्रित है। वास्तव में गोदान भारतीय किसानों की त्रासदी को दर्शाता है। नायक होरी एक ईश्वर से डरने वाला व्यक्ति है जो पारंपरिक मूल्यों और रीति-रिवाजों का उल्लंघन करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। यदि आप मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ पढ़ना पसंद करते है तो निश्चय ही यह उपन्यास आपकों बहुत पसंद आएगा । 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
    Voir livre
  • Sarp Raag - Malgudi Days by R K Narayan - सर्प राग - मालगुडी डेज़ आर के नारायण - cover

    Sarp Raag - Malgudi Days by R K...

    R. R.K.Narayan

    • 0
    • 0
    • 0
    Sarp Raag - Malgudi Days by R. K. Narayan – सर्प राग - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण 
    "Sarp Raag" is a gripping tale from R. K. Narayan’s Malgudi Days, where a once-promising flutist shares his haunting past. After disrespecting a saint who interrupted his musical practice, he is cursed to lose his talent forever. This Hindi audiobook unfolds themes of arrogance, divine wrath, and the fragility of artistic ego — told with a blend of mysticism and emotion that defines Malgudi's storytelling charm. 
    "एक दिन एक लड़की अपने परिवार के साथ एक संगीत समारोह के लिए गयी थी जहाँ उसे एक बेहद बातूनी आदमी मिला। वह आदमी उस परिवार को अपने अतीत और अपने संगीत के बारे में बताने के लिए उत्सुक था। वह उन्हें बताने लगा कि एक समय था जब वह भी संगीत सीखता था, और वह इतना अच्छा था कि उसके शिक्षक भी उसे दर्शकों के सामने गवाना चाहते थे। एक रात वह रोज़ की ही तरह अपने संगीत के अभ्यास में मग्न था कि तभी एक साधु ने भिक्षा माँगते हुए उसका दरवाज़ा खटखटाया। पर उसने ध्यान नहीं दिया और अपना अभ्यास करता रहा। लेकिन साधू के लगातार दरवाज़ा खटखटाने उसके अभ्यास में रुकावट आ रही थी, जिससे वह गुस्सा हो गया और दरवाज़ा खोलकर उस साधू खरी खोटी सुनाने लगा. उसने साधू भिक्षा देने से भी इंकार कर दिया। उसका ऐसा बर्ताव देखकर साधू ने उसे श्राप दिया कि यह रात उसके संगीत की आखरी रात होगी और अगले दिन उसे अपनी बांसुरी मुट्ठी के भाव बेचनी पड़ेगी।“ 
    लेखक आर. के. नारायण 
    “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
    Voir livre
  • Unmaad - Munshi Premchand Ki Kahani - उन्माद - मुंशी प्रेमचंद की रहस्यमयी कहानी - cover

    Unmaad - Munshi Premchand Ki...

    Munshi Premchand

    • 0
    • 0
    • 0
    उन्माद - मुंशी प्रेमचंद की रहस्यमयी कहानी - Unmaad - Munshi Premchand Ki Kahani 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'उन्माद' मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विषयों को गहराई से छूने वाली एक अनोखी रचना है। यह कहानी मानवीय मन की जटिलताओं, भ्रम और वास्तविकता के बीच के संघर्ष को प्रस्तुत करती है। 
    'उन्माद' में प्रेमचंद ने समाज और व्यक्तित्व के बीच के तनाव, भावनात्मक उथल-पुथल और मानसिक स्थिति का अत्यंत संवेदनशील चित्रण किया है। यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि जब भावनाएँ और वास्तविकता टकराते हैं तो क्या होता है। इसे जरूर सुनें और इस अद्भुत कथा का आनंद लें। 
    🔸 कहानी का नाम: उन्माद  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: मनोवैज्ञानिक, सामाजिक 🔸 
     मुख्य विषय: मानसिक उथल-पुथल, सामाजिक संघर्ष  
    🔸 मुख्य पात्र: उन्माद से जूझता व्यक्ति  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु:  
    मानवीय मनोविज्ञान की जटिलता  
    भ्रम और वास्तविकता का संघर्ष  
    मानसिक स्थिति और सामाजिक दबाव  
    मुंशी प्रेमचंद की गहन लेखनी 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
    Voir livre
  • Prayashchit - Munshi Premchand - प्रायश्चित - मुंशी प्रेमचंद - cover

    Prayashchit - Munshi Premchand -...

    Munshi Premchand

    • 0
    • 0
    • 0
    प्रायश्चित - मुंशी प्रेमचंद - Prayashchit - Munshi Premchand 
    मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'प्रायश्चित' मानव जीवन की जटिलताओं और समाज के नैतिक मूल्यों को बारीकी से प्रस्तुत करती है। यह कहानी अपराध, पश्चाताप, और सुधार की गाथा है, जो पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है।  
    🔸 कहानी का नाम: प्रायश्चित  
    🔸 लेखक: मुंशी प्रेमचंद  
    🔸 शैली: सामाजिक, नैतिक, भावनात्मक  
    🔸 मुख्य विषय: अपराध और पश्चाताप  
    🔸 मुख्य पात्र: एक अपराधी और उसका समाज के प्रति उत्तरदायित्व  
    🌟 कहानी के मुख्य बिंदु: 
    अपराध का सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभाव  
    प्रायश्चित के माध्यम से आत्मा की शुद्धि  
    मानवीय संबंधों की जटिलता और उनके समाधान  
    प्रेमचंद की गहरी सामाजिक दृष्टि और कहानी का नैतिक संदेश  
    इस कहानी के माध्यम से जानें कि कैसे एक अपराधी का पश्चाताप समाज के लिए प्रेरणा बनता है। 'प्रायश्चित' प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं में से एक है, जो आज भी प्रासंगिक है। इसे जरूर सुनें और अपने विचार साझा करें। 
    मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी साहित्य के ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने अपनी कलम से समाज के सजीव चित्र प्रस्तुत किए। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, लेकिन "प्रेमचंद" के नाम से वे जन-जन के लेखक बन गए। उनकी कहानियाँ जैसे "ईदगाह" और "कफन" आम इंसान के संघर्ष, भावनाओं और संवेदनाओं का दर्पण हैं। प्रेमचंद ने गरीबों, किसानों और मजदूरों के दुःख-दर्द को अपनी कहानियों में ऐसा उकेरा कि पाठक उनके पात्रों के साथ जीने लगते हैं। उनके उपन्यास "गोदान" और "गबन" समाज में सुधार और समानता का संदेश देते हैं। आज भी उनकी रचनाएँ हमें जीवन के गहरे अर्थों से रूबरू कराती हैं।
    Voir livre
  • Pita Ki Sahayta - Malgudi Days by R K Narayan - पिता की सहायता - मालगुडी डेज़ आर के नारायण - cover

    Pita Ki Sahayta - Malgudi Days...

    R. R.K.Narayan

    • 0
    • 0
    • 0
    Pita Ki Sahayta - Malgudi Days by R. K. Narayan – पिता की सहायता - मालगुडी डेज़ आर. के. नारायण“Pita Ki Sahayta” is a humorous and emotional story from R. K. Narayan’s Malgudi Days, centred on a mischievous schoolboy named Swami. In an attempt to skip school, he lies to his strict father, triggering a series of unintended consequences involving his innocent teacher, Samuel. This Hindi audiobook explores childhood, parenting, and honesty in a light-hearted yet meaningful narrative. 
    "स्वामी सोमवार को देर तक सोता है और अपनी मां को उसे स्कूल ना भेजकर घर में ही रहने देने की विनंती करता है। लेकिन, उसके पिता इस बात से इंकार करते हैं और सरदर्द में भी उसे स्कूल जाने के लिए ज़ोर देते हैं। इसलिए, स्वामी झूठ बोलता है कि सैमियूल नामक उसके एक शिक्षक बच्चों पर हाथ उठाते हैं। स्वामी के पिता उसके हाथों हेडमास्टर के लिए संदेश भिजवाते हैं। पत्र में कुछ ऐसा लिखा हो सकता था जिससे सैमियूल की नौकरी चली जाए या उसे सज़ा हो जाए। जब वह हेडमास्टर को संदेश देने की कोशिश करता है, तो पता चलता है कि वे पूरा हफ्ता छुट्टी पर हैं। उनके स्थान पर असिस्टेंट हेडमास्टर संदेश स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन वह तो सैमियूल है। पिता को स्वामी की हेडमास्टर वाली बात झूठ लगती है और वे उससे कहते हैं कि वह सैमियूल जैसे शिक्षक के ही लायक है।" 
    लेखक आर. के. नारायण 
    “मालगुडी डेज” भारत के प्रख्यात लेखक आर.के.नारायण द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर की कहानी है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन भी किया, जिसे 'मालगुडी डेज़' कहते हैं। मालगुडी, दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जो की आर.के.नारायण की ही कल्पना थी। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर.के.नारायण भी अनजान थे। कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते हैं क्योंकि वहां पर भी ऐसी ही इमारतें और घर थे।
    Voir livre
  • Intzaar - A Story by Dr Pushpa Saxena - इंतज़ार - डा० पुष्पा सक्सेना की लिखी कहानी - cover

    Intzaar - A Story by Dr Pushpa...

    Dr. Pushpa Saxena

    • 0
    • 0
    • 0
    इंतज़ार - डा० पुष्पा सक्सेना की लिखी कहानी - Intzaar - A Story by Dr. Pushpa Saxena 
     "इंतज़ार" डॉ. पुष्पा सक्सेना की एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है, जो प्रतीक्षा, प्रेम, और जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है। यह कहानी उन भावनाओं को उजागर करती है, जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल होता है। 
    🔹 इस कहानी में: इंतज़ार की गहराई और उसकी पीड़ा। 
    प्रेम और रिश्तों की कोमलता। 
    जीवन के निर्णयों का प्रभाव। 
    एक महिला के संघर्ष और धैर्य की मार्मिक कथा। 
    🖋️ लेखक: डॉ. पुष्पा सक्सेना  
    📚 श्रेणी: हिंदी साहित्य | 
    सामाजिक कथा | 
    भावनात्मक कहानी 
    🎙️ इस दिल को छू लेने वाली कहानी को सुनें और महसूस करें इंतज़ार का असली अर्थ। 
    पुष्पा सक्सेना का जन्म 20 अगस्त 1926 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था। वे हिंदी साहित्य की जानी-मानी लेखिका थीं, जिन्होंने कहानियों, निबंधों और उपन्यासों के माध्यम से समाज की गहरी समझ प्रस्तुत की। उनकी रचनाएँ महिलाओं के जीवन, उनकी समस्याओं और समाज में उनकी स्थिति को प्रभावशाली ढंग से चित्रित करती हैं। 
    उनकी प्रमुख कृतियों में "प्रतिदान," "अधूरी तस्वीर," और "परिवर्तन" शामिल हैं। पुष्पा सक्सेना ने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया और साहित्य के माध्यम से सामाजिक सुधार की बात की। उनका निधन 15 फरवरी 2004 को हुआ। उनकी रचनाएँ हिंदी साहित्य की धरोहर के रूप में सदैव याद की जाती रहेंगी।
    Voir livre